हर्षवर्धन ने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बेहतर करने लिए नवोन्मेषी एकीकृत रणनीतियों पर जोर दिया

नयी दिल्ली, 28 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सोमवार को कहा कि भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को नयी ऊंचाई तक ले जाने के लिए नवोन्मेषी एकीकृत रणनीतियों पर जोर देने की जरूरत है।

साथ ही, उन्होंने सामूहिक अनुभव एवं ज्ञान से स्वास्थ्य क्षेत्र को फायदा पहुंचाने में नवोन्मेष में जमीनी कार्यकर्ताओं को शामिल करने की जरूरत पर भी बल दिया।

मंत्री ने सोमवार को अच्छे, अनुकरणीय व्यवहारों पर सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन का डिजिटल माध्यम से उदघाटन करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में नवोन्मेष एक अहम तत्व है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान में वर्धन को उद्धृत करते हुए कहा , ‘‘नवोन्मेषी एकीकृत रणनीतियों पर जोर देना जरूरी है, जो भारत में स्वास्थ्य सेवा को एक नयी ऊंचाई पर ले जाएगा। 2020 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नेशनल हेल्थकेयर इन्नोवेशन पोर्टल पर 210 से अधिक नवोन्मेष अपलोड किये। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन नवोन्मेषों का अंतिम लक्ष्य एक ओर जहां लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति को बेहतर बनाना है , वहीं दूसरी ओर जन स्वास्थ्य प्रणाली को सतत तरीके से मजबूत करना भी है। ’’

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में नवोन्मेष पर विचार-विमर्श के लिए जमीनी स्तर के स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को शामिल किया जाना चाहिए तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य आपूर्ति प्रणाली में काम कर रहे लोगों के वर्षों के अनुभव और विशेषज्ञता से प्राप्त सामूहिक ज्ञान का लाभ उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ कोविड-19 पर कार्य से हमें कार्यक्रम लागू करने तथा नवोन्मेष सृजन के नए मार्गों को अपनाने का प्रोत्साहन मिला है। महामारी ने हमें पीपीई किट, वेंटिलेटर, मास्क, टीका आदि बनाने के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ स्वास्थ्य मंत्रालय के ई-संजीवनी डिजिटल मंच के जरिए 10 लाख से अधिक परामर्श दिये गए हैं। यह नवोन्मेषी दृष्टिकोण का परिणाम है जो समन्वित प्रयासों से निकला है। ’’

उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकतम आदान-प्रदान से बेहतर स्वास्थ्य परिणाम, बेहतर निर्णय प्रणाली तथा राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के सुधारों में मदद मिली है।

मंत्री ने टीबी से निपटने से जुड़ी सेवाओं के लिए संचालन दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि इस रोग को नियंत्रित करने की दिशा में भारत सरकार के निरन्तर प्रयासों से इस बीमारी की अधिसूचनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। साथ ही, निदान, अनुपालन और इलाज की व्यवस्था भी बेहतर हुई है।

उन्होंने कहा कि 2019 में टीबी के लापता मामलों की संख्या घटकर 2.9 लाख रह गई, जबकि यह संख्या 2017 में 10 लाख थी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है।

भाषा

सुभाष पवनेश

पवनेश

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password