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Happy Birthday MS Dhoni: पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 7 जुलाई 2024 को अपना 43वां जन्मदिन मना रहे हैं। धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 में झारखंड की राजधानी रांची में हुआ था। धोनी एक मध्यवर्गीय परिवार से आते थे, लेकिन क्रिकेट खेलने की ललक ने उन्हें न सिर्फ भारत का बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों की सूची में लाकर खड़ा कर दिया।
आपको जानकर हैरानी होगी कि क्रिकेट जगत में नाम शोहरत और पैसा कमाने वाले महेंद्र सिंह धोनी को बचपन में क्रिकेट बिल्कुल भी पसंद नहीं था। धोनी बचपन में फुटबॉल खेला करते थे और अपनी स्कूल टीम में गोलकीपिंग किया करते थे।
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तभी उनके स्कूल के स्पोर्ट टीचर को एक विकेटकीपर की तलाश थी और उनकी यह तलाश मही (महेंद्र सिंह धोनी) पर जाकर समाप्त हुई। यह वही समय था जब भारत को तीन-तीन आईसीसी ट्रॉफी जीताने वाले कप्तान ने पहली बार क्रिकेट की ओर रुख किया था।
पिता चाहते थे धोनी सरकारी नौकरी करे
महेंद्र सिंह धोनी के पिता पान सिंह चाहते थे कि महेंद्र सिंह धोनी पढ़ लिखकर एक अच्छी सरकारी नौकरी करे, लेकिन तब तक धोनी ने क्रिकेट का स्वाद चख लिया था और वह भारत के लिए क्रिकेट खेलना चाहते थे।
मगर उनके घर की आर्थिक स्थिति कुछ ज्यादा खास नहीं थी, जिससे उन्हें अकसर क्रिकेट किट खरीदने के लिए संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन धोनी ने कभी हार नहीं मानी और वह अपने काबिलयत और भारत के लिए क्रिकेट खेलने की चाह में आगे बढ़ते जा रहे थे।
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धोनी की टीम को अंडर-19 ट्रायल में करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण उनका भी चयन नहीं हुआ। इसी बीच धोनी को रेलवे में नौकरी करने का मौका मिला और उन्होंने इसके लिए हां कर दी। दरअसल, उनके पिता और माता चाहती थीं कि धोनी इस नौकरी को ज्वाइन कर लें, मगर धोनी चाहते थे कि वह अपनी क्रिकेट की प्रैक्टिस को जारी रखें।
धोनी ने आखिरकार टीटीई की नौकरी के लिए हामी भर दी थी। धोनी ने 2001 से 2003 तक, भारतीय रेलवे के दक्षिण पूर्वी रेलवे जोन के तहत खड़गपुर में TTE के रूप में काम किया था। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। इस दौरान धोनी काम के साथ-साथ अपनी क्रिकेट की प्रैक्टिस भी किया करते थे।
अचानक छोड़ी टीटीई, फिर किया इंडिया ए के लिए डेब्यू
टीटीई की नौकरी छोड़ने के बाद धोनी वापस रांची अपने घर आ गए थे, जिसे देखकर पिता काफी हैरान हुए और उन्हें समझाया कि उन्हें ये नौकरी नहीं छोड़नी चाहिए थे, लेकिन नौकरी छोड़ने के कुछ समय बाद ही उन्होंने इंडिया ए के ट्रायल में भाग लिया और इसमें धोनी ने खूब लंबे-लंबे छक्के उड़ाए थे। धोनी की आतिशी बल्लेबाजी देखने के बाद सेलेक्टर्स काफी प्रभावित हुए और उन्हें केन्या टूर के लिए इंडिया ए टीम में शामिल कर लिया गया।
केन्या टूर पर मचाई तबाही
केन्या टूर पर इंडिया ए टीम के लिए महेंद्र सिंह धोनी ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था। पचास ओवर के इस टूर्नामेंट में धोनी ने आतिशी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए दो शतक ठोके थे। यह वहीं समय था जब चारों तरफ महेंद्र सिंह धोनी की चर्चाएं शुरू हो गई थी।
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सेलेक्टर्स भी उनके नाम पर विचार करने लगे थे। कुछ समय बाद ही धोनी को भारत की सीनियर टीम में चुन लिया गया था और उन्हें साल 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में डेब्यू करने के मौका मिला, लेकिन वह अपने डेब्यू मैच में ही बिना खाता खोले पहले गेंद पर ही रन आउट होकर पवेलियन लौट गए।
इसी दौरे पर दूसरे मैच में वह 12 और तीसरे मैच में नाबाद सात रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे। उनके इस प्रदर्शन के बाद माना जा रहा था कि उन्हें सेलेक्टर्स आगे मौका नहीं देंगे।
पाकिस्तान के खिलाफ चमके मही
महेंद्र सिंह धोनी पर सेलेक्टर्स ने एक बार फिर दांव लगाया और उन्हें 2005 में भारत दौरे पर आई पाकिस्तान टीम के खिलाफ वनडे चुना गया। पहले मैच में भी पाकिस्तान को नीचे खिलाया गया और वह सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हो गए।
मगर इसके बाद भारत और पाकिस्तान को दूसरा वनडे विशाखापट्टनम में खेलना था। इस मैच में कप्तान सौरव गांगुली ने धोनी को नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने का मौका दिया और उन्होंने इस मौके को दोनों हाथों से लपका। धोनी ने पाकिस्तान की सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग अटैक के सामने महज 123 गेंदों पर 148 रन ठोक दिए थे। यह वहीं पारी थी, जिसके बाद धोनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा था।
धोनी के लंबे बालों के फैंस हुए मुशर्रफ
साल 2006 में भारतीय टीम को पाकिस्तान का दौरा करना था। इस टूर के पहले मैच में धोनी को नंबर चार पर बल्लेबाजी करने का मौका मिला और उन्होंने 65 बॉल पर 65 रन की पारी खेली थी। दूसरे मैच में धोनी को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला, लेकिन तीसरे मैच में एक बार फिर 72 रन की आतिशी पारी खेली।
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धोनी का पाकिस्तान का दौरा काफी यादगार रहा था, लेकिन इसमें एक यादगार लम्हा ये भी था कि उन वक्त पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ भी उनकी बल्लेबाजी और उनके लंबे बालों के कायल हो गए थे। उस दौरान उन्होंने कहा था वह इन लंबे बालों को कभी ना कटाएं।
2007 में बने कप्तान
महेंद्र सिंह धोनी भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर चुके थे, लेकिन वनडे वर्ल्ड कप 2007 में बांग्लादेश के हाथों मिली शर्मनाक हार के बाद राहुल द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ दी थी। इसके बाद धोनी को भारतीय टीम की कमान सौंपी गई, जिसके बाद आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2007, सीबी सीरीज 2008 (ऑस्ट्रेलिया), एशिया कप 2010, आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2011 और आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी 2013 अपनी कप्तानी में जीतीं। उनकी कप्तानी में ही भारत ने साल 2009 में 1973 के बाद दूसरी बार टेस्ट की नंबर वन टीम बनी थी।
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जहां से की शुरुआत नहीं किया अंत
महेंद्र सिंह धोनी ने अपना अंतिम वनडे मुकाबला आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। उस मैच की पारी में महेंद्र सिंह धोनी रन आउट हो गए थे, जिससे भारतीय टीम वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में हार गई थी।
खास बात यह है कि धोनी ने अपने करियर की शुरुआत वनडे फॉर्मेट से की थी, जिसमें वह रन आउट हो गए थे। जबकि उन्होंने अपना अंतिम मुकाबला खेला तब भी वनडे में रन आउट हो गए थे। महेंद्र सिंह धोनी 15 अगस्त 2020 को इंटरनेशनल क्रिकेस से संन्यास का ऐलान कर दिया था। हालांकि, वह आईपीएल में अभी भी चेन्नई सुपर किंग्स के साथ बने हुए हैं।
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