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Gwalior Library: यहां संविधान की मूल प्रति देख सकेंगे, आपको पढ़ाई के लिए लेपटॉप भी मिलेगा: जानें कैसे बदली इसकी किस्मत

Gwalior Library: यहां संविधान की मूल प्रति देख सकेंगे, आपको पढ़ाई के लिए लेपटॉप भी मिलेगा, जानें कैसे बदली इसकी किस्मत

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BP Shrivastava
Gwalior Library: यहां संविधान की मूल प्रति देख सकेंगे, आपको पढ़ाई के लिए लेपटॉप भी मिलेगा: जानें कैसे बदली इसकी किस्मत

हाइलाइट्स

  • GMA टीम ने हेरिटेज वॉक के तहत किया लाइब्रेरी का भ्रमण
  • राष्ट्रपति से पुरस्कृत मध्यप्रदेश की पहली ई-लाइब्रेरी
  • ग्वालियर की ई-लाइब्रेरी में सभी आधुनिक सुधाएं उपलब्ध
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Gwalior Library: ग्वालियर मैनेजमेंट एसोसिएशन (GMA) की हेरिटेज वॉक में एक रोचक जानकारी निकल कर आई है।

जिसमें पता चला है कि ग्वालियर की सेंट्रल लाइब्रेरी (e-लाइब्रेरी) ऐतिहासिक है और समय के साथ इस लाइब्रेरी (Gwalior Library) में बदलाव किए गए हैं।

यहां अब किताबों के अलावा लेपी लैब भी है यानी छात्रों को पढ़ाई के लिए लेपटॉप भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

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GMA ने किया लाइब्रेरी का भ्रमण

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GMA के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल और सचिव श्याम अग्रवाल ने अपनी टीम के साथ महाराज बाड़ा स्थित ई-लाइब्रेरी (Gwalior Library) का भ्रमण किया।

GMA टीम ग्वालियर की ब्रांडिंग करने के उद्देश्य से यहां पहुंची थी।

उन्होंने बताया कि संस्था की कार्यकारिणी बैठक में हेरिटेज वॉक की शुरुआत करने का निर्णय लिया गया था।

उसी के तहत सेंट्रल लाइब्रेरी (ई-लाइब्रेरी) और प्लेनटोरियम म्यूजियम ( स्काउट एंड गाइड ) का भ्रमण किया।

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यहां बता दें, ग्वालियर मैनेजमेंट एसोसिएशन (GMA) AIMA नई दिल्ली से संबंधित संस्था है।

लाइब्रेरी में संविधान की मूल प्रति उपलब्ध

लाइब्रेरी (Gwalior Library) मैनेजर विवेक सोनी ने बताया कि यह मध्यप्रदेश की पहली लाइब्रेरी है, जिसे राष्ट्रपति ने पुरस्कृत किया है।

उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी (Gwalior Library) में भारत के संविधान की मूल प्रति मौजूद है।

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जिसे आमजनता को देखने के लिए गणतंत्र दिवस, स्वंत्रता दिवस और संविधान दिवस पर देखने के लिए रखा जाता है।

लाइब्रेरी में सिंधिया महल से आईं थी किताबें

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उन्होंने बताया कि यह लाइब्रेरी (Gwalior Library) वर्ष 1927 से स्थापित है। यहां सबसे पहले सिंधिया महल से किताबें आईं थीं।

इस लाइब्रेरी बिल्डिंग में पहले कभी कोर्ट लगा करती थी।

लाइब्रेरी में छात्रों को लेपटॉप भी दिए जाते हैं

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सोनी ने बताया कि यह लाइब्रेरी (Gwalior Library) मध्यप्रदेश ही नहीं भारत की पहली लाइब्रेरी है।

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जिसमें लेपी लैब बनी हुई है। मतलब लेपटॉप भी सदस्यों को प्रतिदिन निश्चित समय के लिए आवंटित किए जाते हैं।

वहीं जो स्टूडेंट वहां के सदस्य हैं। उन्हें कोई बुक की जरूरत है और वह लाइब्रेरी में नहीं है तो वह चाहे जितनी कीमत की हो लाइब्रेरी प्रबंधन उस बुक को क्रय करके स्टूडेंट को पड़ने के लिए उपलब्ध करवाता है

और इसके लिए कोई अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जाती है।

लाइब्रेरी पूरी तरह आधुनिक, एक लाख से ज्यादा किताबें

सोनी ने बताया की एक लाख 10 हजार से ज्यादा बुक लाइब्रेरी (Gwalior Library)में हैं। जिसमें 70 हजार से ज्यादा बुक सेल्फ में e-कोडिंग के साथ व्यवस्थित हो चुकी हैं।

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जो पूरे ऑटोमेटिक सिस्टम पर हैं। यदि यह बुक लाइब्रेरी परिसर के बाहर बिना अनुमति के जाएगी तो सायरन बज जाएगा।

वहीं लाइब्रेरी (Gwalior Library) वाई-फाई के साथ पूर्णतः AC है। इसके साथ 18 न्यूज पेपर और 36 मैगजीन नियमित यहां आती हैं।

इसके साथ ही सन 1910 से गजट नोटिफिकेशन पूर्णतः व्यवस्तिथ हैं। जो जरूरत पड़ने पर आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

 IPS मनोज शर्मा ने भी किया इसी लाइब्रेरी में अध्ययन

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12th फैल मूवी की लाइव स्टोरी के जनक IPS मनोज शर्मा ने भी ग्वालियर में रहकर इस लाइब्रेरी (Gwalior Library) का उपयोग किया था।

जिसके बाद वे आईपीएस बने और बाद में उनको लेकर 12th फैल मूवी बनी।

GMA ने बच्चों से फीडबैक लिया

जीएमए दल को भ्रमण के दौरान लाइब्रेरी (Gwalior Library) में करीब एक सैकड़ा से अधिक बच्चे स्टडी करते मिले।

जिनसे GMA के पदाधिकारियों ने बच्चों से चर्चा कर फीडबैक लिया। जिसमें सभी छात्र-छात्राओं ने पूर्ण संतुष्टि जताई।

लाइब्रेरी में दी जाती है 13 तरह की सदस्यता 

इस लाइब्रेरी (Gwalior Library) में 13 तरह की सदस्यता प्रदान की जाती है।

आज यह लाइब्रेरी बच्चों की पहली पसंद बन चुकी है। इसलिए यहां सैकड़ों की वेटिंग भी रहती है।

पहले कारागार था लाइब्रेरी भवन 

ग्वालियर के सबसे प्रमुख स्थान जीवाजी चौक, जिसे अब महाराज बाड़ा कहते हैं, के पास स्थित यह लाइब्रेरी (Gwalior Library) की बिल्डिंग।

जिसमें कभी कारागार हुआ करता था। बताते हैं आज भी लाइब्रेरी बिल्डिंग के मुख्य प्रवेश द्वार पर उसी कारागार गेट लगा हुआ है।

पीएचडी के लिए लाइब्रेरी में पर्याप्त मटेरियल

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इसके बाद GMA के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने कहा की लाइब्रेरी (Gwalior Library) ग्वालियर की धरोहर है।

जो सिंधिया राजवंश द्वारा स्थापित की गई थी। ये लाइब्रेरी आज मध्यप्रदेश की पहली लाइब्रेरी बन चुकी है।

डॉ.अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी को Phd करना हो तो यहां इतना मटेरियल है कि उसे कहीं भी जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

रोचक है लाइब्रेरी के आधुनिक बनने की कहानी

कलेक्टर ने लाइब्रेरी बिल्डिंग को गिराने का भेज दिया था प्रस्ताव

साल 2014 में जब गजराराजा स्कूल का एक भाग गिर पड़ा तो तत्कालीन कलेक्टर ने इस भवन को भी जमींदोज कर स्कूल भवन बनाने का प्रस्ताव भोपाल भेजा था।

जबकि बिल्डिंग का फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं किया गया था। इसके लिए एक बैठक भोपाल में बुलाई गई।

जिसमें लाइब्रेरी (Gwalior Library) मैनेजर सोनी को भी बुलाया गया। तब वे वहां वह एक PPT तैयार करके ले गए थे, लेकिन उसे नहीं देखा गया।

बावजूद इसके जब यह बताया गया कि बिल्डिंग का फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं हुआ है। तो फिर फिजिकल वेरिफिकेशन के आदेश हुए।

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यह रहा टर्निंग पॉइंट...

सोनी ने बताया कि यह ही इसका टर्निंग पॉइंट था। बाद में फिजिकल वेरिफिकेशन में यह निकलकर आया की यह बिल्डिंग बहुत पुरानी है और अगले दो सौ साल तक इसका कुछ नहीं बिगड़ने वाला है। तब इसे गिराने का निर्णय रोका गया।

स्मार्ट सिटी सीईओ मुखर्जी ने पहली नजर में ही बिल्डिंग की महत्वता समझी

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उसके बाद एक दिन स्मार्ट सिटी की CEO विदिशा मुखर्जी से गाड़ी पार्क करने के दौरान सोनी की मुलाकात हुई।

उन्होंने लाइब्रेरी (Gwalior Library) बिल्डिंग की बदहालत को देखने का अनुरोध किया।

पहली नजर में ही भवन को देखकर सीईओ मुखर्जी ने कहा कि यह हेरिटेज भवन तो शहर की गरिमा को बढ़ा सकता है।

इसके बाद उन्होंने इसके रख रखाव के लिए करीब एक करोड़ रुपए का फंड मंजूर किया।

काम यहीं नहीं रूका, बल्कि स्मार्ट सिटी CEO मुखर्जी ने इसे आगे बढ़ाया। जिसमें लगभग 12 करोड़ की लागत से इसे अति आधुनिक बनाया गया।

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