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MP Govt Job Issue: ग्रुप-2 सब ग्रुप-4, नगर निवेशक तथा सहायक अतिक्रमण अधिकारी पद हेतु संयुक्त भर्ती परीक्षा-2022 की मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाली याचिका एमपी हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है।
जबलपुर हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन मंडल (ESB) और नगरीय विकास एवं आवास विभाग (UADD) से 4 सप्ताह में जवाब (MP Govt Job Issue) मांगा है।
याचिका में ये लगाये गए आरोप
हाईकोर्ट में राज्य के पटवारी तथा अन्य पदों की भर्ती की मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाली एक याचिका की सुनवाई की जा रही है। याचिकाकर्ता भगवान मुखरैया ने नगर निवेशक तथा सहायक अतिक्रमण अधिकारी की मेरिट लिस्ट में योग्यता धारी अभ्यर्थियों को बाहर तथा अयोग्य अभ्यर्थियों को मेरिट लिस्ट में जगह देने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने बताया कि मध्यप्रदेश के लिए ये गंभीर मामला है। कोई भी डिग्री हो ये अभ्यर्थी की पसीने की कमाई होती है और जब पता चलता है की भर्ती प्रक्रिया में जो मेरिट लिस्ट बनी है। उसमें बिना डिग्री धारी को मेरिट में जगह दे दी गई है। तो ये मामला और भी गंभीर हो जाता है।
भर्ती में नहीं भरे गए 20% भी पद
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी के अनुसार नगर निवेशक तथा सहायक अतिक्रमण अधिकारी के कुल पदो में से इंदौर में 17 में से 16 पद खाली है। भोपाल में 16 में से 13, जबलपुर में 19 में से 16 और ग्वालियर में 16 में से 12 पद खाली हैं।
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यानी शासन ने ग्रुप-2 सब ग्रुप-4 की जो संयुक्त भर्ती निकाली उसमें 20% पद भी नहीं भरे गए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में पद का खाली होना विभाग की लापरवाही का नतीजा है।
यह याचिका कोर्ट में हुई दाखिल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में ESB को आवेदन पत्रों को अलग करने के बाद उम्मीदवारों की पात्रता के अनुसार उन्हें छांटने के बाद चयन सूची को फिर से तैयार करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की। ताकि अधूरे विषय पदों को याचिकाकर्ता जैसे योग्य उम्मीदवारों से भरा जा सके। मामले की सुनवाई जबलपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की बेंच कर रही है।
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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने तर्क दिया कि वर्तमान मेरिट लिस्ट की प्रक्रिया शासन तथा सिस्टम की गुणवत्ता को कमजोर करती है और इससे हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
इन्हें भेजा गया नोटिस
इस मामले में प्रतिवादी पक्षों में मध्य प्रदेश राज्य के प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास निदेशालय और निदेशक (प्रशासन) कर्मचारी चयन बोर्ड को नोटिस जारी किये गए हैं।
सुनवाई के बाद खंडपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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