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गर्भसंस्कार कार्यक्रम : महिलाओं को बताया गर्भावस्था में रहने के उपाय

गर्भसंस्कार कार्यक्रम : महिलाओं को बताया गर्भावस्था में रहने के उपाय Garbh Sanskar program held in Bansal Hospital vkj

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deepak
गर्भसंस्कार कार्यक्रम : महिलाओं को बताया गर्भावस्था में रहने के उपाय

भोपाल : बंसल अस्पताल में सुफल गर्भावस्था सपोर्ट ग्रुप डॉ. प्रिया भावे चित्तावार के द्वारा गर्भसंस्कार का कार्यक्रम 21 मई 2022 को आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि माधुरी शर्मा एवं राजो मालवीय रही ,मुख्य वक्ता डॉ आराधना गर्ग एवं डॉ मंजुला विश्वास रही। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से किया गया। जिसमें माधुरी शर्मा एवं राजो मालवीय, डॉ मंजुला विश्वास, डॉ.आराधना गर्ग,डॉ.शैलजा त्रिवेदी एवं डॉ.नीतू सिमैया ने किया।

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सर्वप्रथम माधुरी शर्मा ने बताया कि सभी गर्भवती महिलाओं को पहले नहीं पता था कि गर्भ के समय क्या करना चाहिए ,क्या नहीं करना चाहिए, जो आज इस गर्भावस्था सफल सपोर्ट ग्रुप के द्वारा बताया जा रहा है । गर्भावस्था के दौरान मोबाइल से दूर रहना चाहिए ,परिवार के साथ रहना चाहिए, अच्छी पुस्तकें पढ़ना चाहिए, अच्छा आचरण करना चाहिए साथ ही गोद भराई के बारे में भी जो 16 संस्कारों में से एक है के बारे में भी बताया।

राजो मालवीय ने बताया कि गर्भावस्था के पहले से ही गर्भवती महिला को मां बनने की तैयारी करना चाहिए। हमारी जिम्मेदारी है कि हम समाज को अच्छी पीढ़ी दे। हमारे वेद पुराणों में जैसे महाभारत में भी इसका उल्लेख देखने को मिलता है, अभिमन्यु इसका एक सफल उदाहरण है। डॉ मंजुला विश्वास ने बताया कि डिलीवरी के बाद माता को बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करवाना चाहिए। अधिकतर लड़कियों को ब्रेस्ट फीडिंग के बारे में पता नहीं होता है ,ना ही उसकी प्रोसेस पता होती है । शुरुआत के तीन दिन ही ब्रेस्ट फीडिंग के लिए बहुत इंपॉर्टेंट होते हैं । उन्होंने बताया कि मां को गर्भावस्था के दौरान ही ब्रेस्ट फीडिंग के लिए तैयार होना चाहिए साथ ही मां का आत्मविश्वास होना चाहिए । उन्होंने बताया कि किस तरह बच्चे को गोद में लेना चाहिए और कैसे फीडिंग करवाना चाहिए।

डॉ. आराधना गर्ग ने भी बताया कि गर्भावस्था के दौरान माता को अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए ,साथ ही पिता को भी माता को समय-समय पर सपोर्ट करते रहना चाहिए । इस समय सहज रहना चाहिए ,सरल रहना चाहिए। माता को अपने दिमाग को शांत रखना चाहिए ।जैसा माता सोचेगी वैसा ही गर्भ में पल रहे बच्चे पर उसका असर पड़ेगा। डॉ. प्रिया भावे चित्तावार ने बताया कैसे उन्होने अपना ये सफर शुरू किया ।उन्होंने कहा जब 2013 में एंब्रोकल्चर के प्रोग्राम में सम्मिलित हुए तब उन्हे लगा कि डॉक्टर होते हुए क्या ये मेरी जिम्मेदारी नहीं की जो भ्रूण डाला हो वो अच्छी क्वालिटी का हो, समाज को अच्छा नागरिक दे। उन्होंने बताया 2014 में एक छोटी सी शुरुआत की थी जो आज यहां तक पहुंची। उन्होंने अपनी इस सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। आज कार्यक्रम में डॉ.प्रिया चित्तावर तथा सभी अतिथियों ने मिलकर गोद भराई का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। साथ ही डॉक्टर प्रिया भावे चित्तावार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया ।

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