टीआरपी घोटाले में गिरफ्तार बीएआरसी के पूर्व सीईओ अस्पताल में भर्ती

मुंबई, 16 जनवरी (भाषा) टेलीविजन रेटिंग एजेंसी बीएआरसी के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता को रक्त शर्करा का स्तर स्तर बढ़ने के बाद यहां स्थित एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है। दासगुप्ता को कथित फर्जी टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स (टीआरपी) मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी।

दासगुप्ता की पुत्री ने ट्वीट करके आरोप लगाया कि उन्हें जेल में प्रताड़ित किया गया। दासगुप्ता की पुत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य से ‘‘उनका जीवन बचाने’’ की अपील भी की।

जेल के एक अधिकारी ने बताया कि मधुमेह से पीड़ित दासगुप्ता को रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने पर करीब मध्यरात्रि में नवी मुंबई स्थित तलोजा केंद्रीय जेल से यहां स्थित सरकारी जे जे अस्पताल अस्पताल ले लाया गया।

अधिकारी ने बताया कि दासगुप्ता को आईसीयू में भर्ती कराया गया है और उन्हें आक्सीजन दी जा रही है।

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) के पूर्व सीईओ दासगुप्ता को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने गत वर्ष 24 दिसम्बर को कथित टीआरपी हेराफेरी मामले में गिरफ्तार किया था।

मुंबई की एक अदालत ने इस महीने की शुरुआत में दासगुप्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और कहा था कि पुलिस के मामले के अनुसार, वह टीआरपी में हेराफेरी के घोटाले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते प्रतीत हुए हैं।

मुंबई पुलिस ने इससे पहले अदालत को बताया था कि रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी ने समाचार चैनल के दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए दासगुप्ता को ‘‘लाखों रुपये’’ की कथित रिश्वत दी थी।

शनिवार को दासगुप्ता की पुत्री प्रत्यूषा दासगुप्ता ने मांग की कि उन्हें किसी प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पीएमओ के साथ-साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करते हुए ‘‘एक असहाय बेटी की दर्द भरी अपील’’ शीर्षक से एक संदेश ट्वीट किया।

प्रत्यूषा दासगुप्ता ने कहा कि उनकी मां को शुक्रवार देर रात लगभग 3 बजे फोन आया कि उसके पिता को बेहोशी की हालत में शुक्रवार को अपराह्न एक बजे अस्पताल लाया गया है।

प्रत्यूषा ने कहा कि 14 घंटे तक परिवार में किसी को भी दासगुप्ता की स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया क्योंकि अधिकारियों के पास उनके संपर्क नंबर कथित तौर पर नहीं थे।

उन्होंने कहा कि जब वे अस्पताल पहुंचे, तो पाया कि उनके पिता बोलने में असमर्थ हैं।

प्रत्यूषा ने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट है कि उन्हें ‘‘जेल के अंदर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था।’’

भाषा. अमित मनीषा

मनीषा

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