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Fake News: संसदीय समिति ने मीडिया संस्थानों में फैक्ट-चेकिंग अनिवार्य करने की सिफारिश की,संसद में पेश हो सकती है रिपोर्ट

फेक न्यूज पर संसद की समिति ने फैक्ट-चेकिंग और लोकपाल अनिवार्य करने की सिफारिश की, एआई फेक कंटेंट पर भी सख्ती की बात कही। fakenews-par-sakhti-sansadiya-samiti-sifarish

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Bansal news
Fake News: संसदीय समिति ने मीडिया संस्थानों में फैक्ट-चेकिंग अनिवार्य करने की सिफारिश की,संसद में पेश हो सकती है रिपोर्ट

हाइलाइट्स

  • मीडिया में फैक्ट-चेकिंग सिस्टम जरूरी

  • फेक न्यूज पर सजा और जुर्माना बढ़ेगा

  • एआई फेक कंटेंट पर रोक की सिफारिश

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Fake News Parliament Committee: लोकतंत्र और समाज पर लगातार बढ़ते फेक न्यूज (Fake News) के खतरे को देखते हुए संसद की स्थायी समिति ने बड़ा सुझाव दिया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देशभर के प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में आंतरिक लोकपाल (Ombudsman) और फैक्ट-चेकिंग सिस्टम (Fact Checking System) अनिवार्य किए जाएं। रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी गई है और इसे संसद के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

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लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए फेक न्यूज गंभीर खतरा

समिति ने कहा है कि फेक न्यूज सिर्फ समाज में भ्रम ही नहीं फैलाती बल्कि लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और मीडिया की साख पर भी सीधा असर डालती है। खासकर सीमा पार से होने वाली अफवाहबाजी और दुष्प्रचार को रोकने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं। इसके लिए समिति ने अंतर-मंत्रालयी टास्क फोर्स (Inter-Ministry Task Force) बनाने की सिफारिश की है।

समिति ने जोर दिया कि फेक न्यूज की परिभाषा साफ और सटीक होनी चाहिए ताकि इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई में कोई भ्रम न रहे। साथ ही, फेक न्यूज फैलाने वालों पर जुर्माने की राशि और सजा को और कड़ा किया जाए।

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मीडिया संस्थानों पर जिम्मेदारी तय करने की बात

रिपोर्ट में कहा गया है कि कानूनों में बदलाव कर संपादकों, कंटेंट हेड्स और प्लेटफॉर्म्स की सीधी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अगर संस्थागत विफलता पाई जाती है तो मालिकों और प्रकाशकों (Publishers) को भी जवाबदेह बनाया जाए। समिति ने सुझाव दिया है कि मीडिया साक्षरता (Media Literacy) को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाया जाए ताकि लोगों में शुरू से ही सही और गलत खबर की पहचान करने की क्षमता विकसित हो सके।

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रिपोर्ट में खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए जा रहे फेक कंटेंट का भी जिक्र किया गया है। समिति ने चिंता जताई है कि महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने वाले एआई आधारित फेक वीडियो और तस्वीरें समाज के लिए खतरनाक हैं। ऐसे मामलों में सख्त सजा और बैन की जरूरत है। साथ ही एआई से बने कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य करने और इसके लिए लाइसेंसिंग की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है।

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संसद समिति की रिपोर्ट में क्या है सुझाव

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने साफ कहा है कि फेक न्यूज लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीमा पार से कई बार अफवाहें और झूठी खबरें जानबूझकर फैलाई जाती हैं ताकि देश में अस्थिरता बढ़े।

समिति ने सुझाव दिया है कि:

  • मीडिया संस्थानों में फैक्ट-चेकिंग सेल बने।

  • आंतरिक लोकपाल नियुक्त किए जाएं।

  • कानून में बदलाव कर संपादकों और प्रकाशकों को जवाबदेह बनाया जाए।

  • फेक न्यूज फैलाने पर जुर्माना और सजा कड़ी की जाए।

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