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डिजिटल अरेस्ट के दौरान लाइव कार्रवाई: CBI अफसर बन युवक को 6 घंटे तक बनाया था बंधक, अचानक पहुंची पुलिस, फिर हुआ ये

Digital Arrest In MP: देश में डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जहां ठग लोगों को धमकी देकर और कई घंटों तक बंधक बनाकर मानसिक प्रताड़ित कर रहे हैं।

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Rohit Sahu
डिजिटल अरेस्ट के दौरान लाइव कार्रवाई: CBI अफसर बन युवक को 6 घंटे तक बनाया था बंधक, अचानक पहुंची पुलिस, फिर हुआ ये

Digital Arrest In MP: देश में डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जहां ठग लोगों को धमकी देकर और कई घंटों तक बंधक बनाकर मानसिक प्रताड़ित कर रहे हैं। भोपाल में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बनकर विवेक ओबेरॉय नाम के एक शख्स को 6 घंटों तक डिजिटल बंधक बनाकर रखा। लेकिन पुलिस ने समय पर पहुंचकर पीड़ित को बचा लिया, जो देश में संभवत: डिजिटल अरेस्ट के दौरान ही कार्रवाई करने का पहला मामला है।

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अरेरा कॉलोनी के करोबारी को किया था डिजिटल अरेस्ट

भोपाल के अरेरा कॉलोनी के कारोबारी को सायबर जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया था। जालसाजों ने 6 घंटे तक उन्हें घर के कमरे में बंधक बनाए रखा। सूचना मिलते ही राज्य सायबर पुलिस  (Cyber Police MP) की टीम ने मौके पर पहुंचकर कारोबारी को जालसाजों के चंगुल से मुक्त बचाया। पुलिस टाइम पर नहीं पहुंचती तो करोबारी के साथ भी ठगी हो जाती।

ठगों ने कहा कमरे से बाहर मत जाता

भोपाल और दुबई में कारपोरेट सेक्टर में काम करने वाले विवेक को शनिवार दोपहर एक बजे अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया। उन्होंने बताया कि विवेक के आधार कार्ड पर ली गई मोबाइल सिम गलत कामों में उपयोग की जा रही है और फर्जी बैंक एकाउंट खोले गए हैं। इसके बाद अज्ञात व्यक्ति ने विवेक को स्काइप ऐड डाउनलोड करवाया और वीडियो कॉल पर फर्जी अधिकारियों से बात कराई, जिन्होंने खुद को ट्राई लीगल सेल, सीबीआई और मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताया। जालसाजों (Cyber Fraud) ने विवेक को कहा कि जांच के दौरान परिवार या किसी और को कुछ नहीं बताना है और कमरे से बाहर नहीं जाना है।

पड़ोसी ने पुलिस को बुलाया

विवेक के पड़ोसी ने उन्हें कई बार फोन किया, लेकिन जब विवेक ने फोन नहीं उठाया, तो पड़ोसी उनके घर गए। परिवार ने बताया कि विवेक वीडियो कॉल पर किसी से बात कर रहे हैं और इन्वेस्टीगेशन पूरा होने तक बाहर नहीं आएंगे। पड़ोसी को शंका हुई और उसने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने राज्य सायबर सेल को सूचना दी, जिसने दो पुलिसकर्मियों को विवेक के घर भेजा।

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पुलिस के आते ही बंद हुई स्क्रीन

जब सायबर पुलिस विवेक के घर पहुंची, तो उन्होंने परिजनों से बातचीत करके कमरे का दरवाजा खुलवाया। उस समय लैपटॉप पर तीन लोग वीडियो कॉलिंग पर विवेक से बात कर रहे थे। पुलिस ने अपना परिचय देते हुए उनसे परिचय पूछा, तो अचानक स्क्रीन ऑफ हो गई और फोन कट गया। विवेक ने पुलिस को बताया कि वह जालसाजों की धमकी से डर गए थे और इसलिए किसी को कुछ नहीं बता रहे थे।

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डिजिटल अरेस्ट का नहीं कोई प्रावधान

देश में डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest Law) नामक कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट के लिए कहता है, तो ऐसे कॉल/मैसेज का जवाब न दें। उस नंबर को ब्लॉक करें और नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि डिजिटल अरेस्ट से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि रुकें, सोचें और फिर कार्रवाई करें।

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