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Dhanteras 2025: क्यों मनाते हैं धनतेरस त्योहार, क्या है पौराणिक कथा, आज क्या खरीदना होता है शुभ

Dhanteras 2025: धनतेरस का दिन धन और आरोग्य दोनों का उत्सव है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से पूजा करता है, उसके जीवन में धन, सौभाग्य और स्वास्थ्य बना रहता है।

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Rahul Garhwal
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हाइलाइट्स

  • कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस
  • धनतेरस पर देवी लक्ष्मी और धन्वंतरि देव की पूजा
  • धनतेरस स्वास्थ्य, धन और सौभाग्य का प्रतीक
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Dhanteras 2025: दीपावली से 2 दिन पहले मनाया जाने वाला धनतेरस समृद्धि, स्वास्थ्य और शुभता का प्रतीक पर्व माना जाता है। इस दिन को धन त्रयोदशी भी कहा जाता है, क्योंकि ये कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन खरीदारी, पूजा और नई शुरुआत को बहुत शुभ माना जाता है।

क्यों मनाते हैं धनतेरस ?

धनतेरस के दिन धन की देवी लक्ष्मी और धन्वंतरि देव की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय धन्वंतरि देव अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे देवताओं के वैद्य माने जाते हैं और उन्हें स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के देवता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए यह दिन धन और आरोग्य दोनों का उत्सव है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से पूजा करता है, उसके जीवन में धन, सौभाग्य और स्वास्थ्य बना रहता है।

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धनतेरस पर यमराज को प्रसन्न करने की परंपरा

एक कथा के अनुसार एक बार राजा हेम की मृत्यु का योग त्रयोदशी की रात तय हुआ था। लेकिन उनकी पत्नी ने पूरी रात दीप जलाकर यमराज को प्रसन्न किया और अपने पति की जान बचा ली। तभी से इस दिन दीपदान करने और यम दीपक जलाने की परंपरा शुरू हुई। कहा जाता है कि इस दिन दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर रहता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

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धनतेरस पर क्या खरीदना सबसे शुभ

धनतेरस को खरीदारी का दिन भी कहा जाता है। इस दिन सोना, चांदी, पीतल, तांबा और स्टील के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा लोग झाड़ू, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, गोल्ड कॉइन, दीपक, गृह उपयोगी वस्तुएं और वाहन या इलेक्ट्रॉनिक सामान भी खरीदते हैं। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी गई चीजें पूरे साल घर में समृद्धि और सौभाग्य लाती हैं।

पूजा का शुभ समय

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धनतेरस की पूजा संध्या के समय (प्रदोष काल) में करना सबसे शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के बाद लगभग 5:30 बजे से 8:00 बजे के बीच पूजा का समय सबसे शुभ होता है। पूजा के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।

पूजा की सामग्री

दीया (घी या तेल का)

धूप, अगरबत्ती

फूल, अक्षत (चावल), रोली

लाल कपड़ा, मिठाई, पान-सुपारी

सिक्के या सोना-चांदी के बर्तन

जल से भरा कलश, नारियल, आम या अशोक के पत्ते

गणेश-लक्ष्मी और धन्वंतरि देव की तस्वीर या मूर्ति

पूजा विधि

पूजा के लिए साफ कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश और धन्वंतरि देव की मूर्तियां या फोटो स्थापित करें।

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सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। 'ओम गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें।

मां लक्ष्मी की पूजा करें।

लक्ष्मी जी को फूल, चावल, मिठाई अर्पित करें।

'ओम श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र के साथ आराधना करें।

धन्वंतरि देव की पूजा करें।

जल और तुलसी अर्पित करें। 'ओम धन्वंतरये नमः' मंत्र से नमस्कार करें।

दीपक जलाकर दीपदान करें। यमराज के नाम से घर के बाहर दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

धनतेरस स्वास्थ्य, धन और सौभाग्य का त्योहार

धनतेरस केवल खरीदारी का त्योहार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, धन और सौभाग्य का प्रतीक पर्व है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में धन के साथ स्वास्थ्य और सकारात्मकता भी उतनी ही जरूरी है।

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