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Dev Uthni Ekadashi 2021: हो जाएं तैयार, उठने वाले हैं देव

Dev Uthni Ekadashi 2021: हो जाएं तैयार, उठने वाले हैं देव Dev Uthni Ekadashi 2021: Get ready, God is about to rise

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Preeti Dwivedi
Dev Uthni Ekadashi 2021: हो जाएं तैयार, उठने वाले हैं देव

नई दिल्ली। पिछले महीनों Dev Uthni Ekadashi 2021 से सो रहे देव जल्द ही उठने वाले हैं। इसी के साथ सभी शुभ कार्यों में मुख्य रूप से विवाह शुरू हो जाएंगे। अविवाहितों के विवाह शुरू हो जाएंगे। वैसे तो तुलसी जी को जल अर्पित करना वर्ष भर अच्छा माना जाता है। आइए हम आपको बताते हैं कि इस दिन की पूजन विधि क्या है। इस दिन किए गए विशेष उपाय अविवाहितों के विवाह कराने में कारगार साबित हो सकते हैं।

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चाहिए गौदान जितना फल, श्रीहरि को चढ़ाएं तु​लसी

कार्तिक माह में किसी भी दिन श्रीहरि को चढ़ाई गई तुलसी से व्यक्ति को कई गौदान के बराबर फल मिलता है। शास्त्रों की मानें तो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन तुलसी विवाह कराने की परंपरा बेहद प्राचीन है। एकादशी के दिन तुलसी विवाह कराते हैं। तो वहीं कुछ लोग द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह कराते हैं। तुलसी विवाह के दिन से भगवान निंद्रा लोक से जाग जाते हैं। इसलिए इस एकादशी को देव उठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल तुलसी विवाह गुरुवार के शुभ संयोग में 15 नवंबर को किया जाएगा।

आप भी जान लें ​तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त

- एकादशी तिथि 14 नवंबर 2021: सुबह 05 बजकर 48 मिनट से शुरू।

- एकादशी तिथि 15 नवंबर 2021: सुबह 06 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी।

तुलसी विवाह विधि —
ऐसी मान्यता है कि तुलसी विवाह के लिए घर के अन्य सदस्यों की तरह ही तैयार होना चाहिए। जिस प्रकार विवाह या शादी समारोह में तैयार होते हैं। उसके बाद घर के आंगन या छत पर तुलसी का पौधा एक लकड़ी चौकी पर बिलकुल बीचों बीच रख दें।

तुलसी के गमले के लिए गन्ने का मण्डप सजाएं। उसके नीचे तुलसी का पौधा रखें। वहीं तुलसी जी पर समस्त सुहाग की सामग्री के साथ लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। गमले में शालिग्राम जी रखें। पर ध्यान रखें कि शालिग्राम जी को चावल नहीं बल्कि उनपर तिल चढ़ाएं। तुलसी और शालिग्राम जी पर दूध में भीगी हुई हल्दी लगाएं और गन्ने के मण्डप पर हल्दी का लेप कर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसका पूजन करें। विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक का पाठ इस दौरान अवश्य करें। इसके साथ ही कुछ मौसमी खाद्य पदार्थों में भाजी, मूली, बेर, आंवला आदि का भगवान को प्रसाद चढ़ाकर इस दिन से इनका सेवन प्रारंभ कर दिया जाता है।

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उठो देव रक्षा करो
तुलसी विवाह के पूजन के बाद से विवाह कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। इसी के साथ कुछ परंपराओं में तुलसी विवाह होने के बाद जब पूजन समाप्त हो जाता है। तब तुलसी की चौकी को घर के सभी सदस्यों बार—बार उपर नीचे उठाते हुए कहते हैं उठो देव रक्षा करो, उठो देव रक्षा करो, क्वारन के ब्याव करो, ब्यावं के चलाओ करो। मान्यता है ऐसा करने से घर के अविवाहितों का विवाह होने लगता है और जिनका विवाह हो चुका होता है उन्हें संतान की प्राप्ति होती है।

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