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MP: डेढ़ साल की बच्ची के फेफड़े में फंसी एलईडी, खांसी बढ़ी तो खुला राज, जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बचाई जान

Damoh Baby LED Light: दमोह की डेढ़ साल की मासूम गरिमा के फेफड़े में फंसी एलईडी को जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने ब्रोंकोस्कॉपी ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित निकालकर उसकी जान बचा ली।

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anjali pandey
MP: डेढ़ साल की बच्ची के फेफड़े में फंसी एलईडी, खांसी बढ़ी तो खुला राज, जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बचाई जान

Damoh Baby LED: जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने दमोह जिले की डेढ़ साल की मासूम गरिमा की जान बचाकर बड़ा कारनामा किया है। बच्ची के फेफड़े की मुख्य श्वसन नली में करीब डेढ़ इंच लंबी एलईडी फंसी हुई थी, जिससे उसकी सांस रुकने का खतरा था। डॉक्टरों ने ब्रोंकोस्कॉपी ऑपरेशन के जरिए एलईडी लाइट को सुरक्षित निकाल लिया। तीन दिन तक आईसीयू में रहने के बाद अब गरिमा पूरी तरह स्वस्थ है।

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खांसी बढ़ी तो खुला राज, एक्सरे में दिखी अजीब वस्तु

[caption id="attachment_923105" align="alignnone" width="788"]publive-image खांसी बढ़ी तो खुला राज, एक्सरे में दिखी अजीब वस्तु[/caption]

दमोह जिले के हीरा सिंह की बेटी गरिमा को एक सप्ताह से लगातार खांसी हो रही थी। परिवार ने पहले उसे निजी अस्पताल में दिखाया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। एक्सरे कराने पर डॉक्टरों को फेफड़े में किसी अजीब वस्तु के फंसे होने का शक हुआ। तुरंत गरिमा को जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

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रातों-रात ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने निकाली एलईडी

[caption id="attachment_923103" align="alignnone" width="771"]publive-image रातोंरात ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने निकाली एलईडी लाइट[/caption]

26 अक्टूबर की रात बच्ची को मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती किया गया। ईएनटी विभाग की टीम ने जांच में पाया कि दाहिने फेफड़े की मुख्य श्वसन नली में एलईडी लाइट फंसी है। इतनी छोटी बच्ची पर ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था, लेकिन डॉक्टरों ने तुरंत ब्रोंकोस्कॉपी की और लाइट को सफलतापूर्वक निकाल लिया। डॉक्टरों के मुताबिक, थोड़ी सी देरी भी जानलेवा साबित हो सकती थी।

तीन दिन आईसीयू में रही, अब पूरी तरह स्वस्थ

ऑपरेशन के बाद गरिमा को पेडियाट्रिक आईसीयू में रखा गया। 27 से 29 अक्टूबर तक बच्ची को मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखा गया। लगातार निगरानी और इलाज से हालत में सुधार हुआ और 29 अक्टूबर को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। गरिमा के माता-पिता ने भावुक होकर कहा, “डॉक्टरों ने हमारी बच्ची को नई जिंदगी दी है, यह किसी चमत्कार से कम नहीं।” मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी इसे डॉक्टरों की विशेषज्ञता और टीमवर्क का परिणाम बताया।

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