Covid-19 : महामारी ने बदल दी हैं आदतें और दिनचर्या

लिब्बी रिचर्ड्स। पर्ड्यू विश्वविद्यालय, जेसिका बैन रॉबर्ट, क्लार्क विश्वविद्यालय, कैथरीन बसबाम, वर्जीनिया विश्वविद्यालय और एल एलिसन फिलिप्स, आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी इंडियाना (यूएस), 13 जनवरी (द कन्वरसेशन) कोविड-19 की यह महामारी कुछ लोगों के जीवन, उनकी प्राथमिकताओं और दिनचर्या में कुछ परिवर्तन लाई है, जिनमें से कुछ स्वागत योग्य हैं और कुछ नहीं। हमने चार विद्वानों से किसी एक ऐसी स्वास्थ्य आदत के बारे में पूछा, जिसे उन्होंने लोगों की जिंदगी को उलट पुलट कर देने वाले कोविड-19 के इन बेचैन महीनों और वर्षों के दौरान अपनाया है। अपने साथ वक्त बिताने के लिए चलनालिब्बी रिचर्ड्स, नर्सिंग की एसोसिएट प्रोफेसर, पर्ड्यू विश्वविद्यालय दो चंचल लड़कों की एक व्यस्त कामकाजी माँ के रूप में, मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं एकांत के मजे लेती हूं; मैं किराने की खरीदारी में भी अपने लिए संतोष ढूंढ लेती हूं। लेकिन जब महामारी आई, तो मेरे यह काम जोखिमपूर्ण गतिविधि हो गए।

अपने लिए समय निकालना कठिन था

इसके बजाय, स्कूल बंद होने और घर पर परिवार के साथ, मैंने उनके साथ अपना समय बिताया और बच्चों का रचनात्मक मनोरंजन किया।लेकिन इस सबके बीच मेरे लिए अपने लिए समय निकालना कठिन था। ऐसा लगता जैसे मेरा ‘‘एकाकी समय’’ मुझे छोड़कर खिड़की से बाहर चला गया। अगर मुझे अपनी दिमागी सेहत ठीक रखनी थी तो मुझे अपने लिए कुछ समय तलाशने की जरूरत थी, लिहाजा मैंने अपने जूते पहन लिए और निकल गई।शुरू में, चलना बस घर से निकलने के लिए था। लेकिन जैसे-जैसे मेरी दिनचर्या अधिक सुसंगत होती गई, मैंने इसके लाभों को पहचानना और अनुभव करना शुरू किया। एक नर्स और शारीरिक गतिविधि शोधकर्ता के रूप में, मैं पहले से ही एक सक्रिय जीवन शैली के महत्व को समझ चुकी थी। लेकिन महामारी से पहले, मैंने केवल शारीरिक पहलुओं पर ही ध्यान केंद्रित किया, जैसे कि मेरी मांसपेशियों को टोंड करना और वजन को स्थिर रखना।मैंने पाया कि इस दौरान मैंने शारीरिक गतिविधि के एक महत्वपूर्ण लाभ मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी की थी। चलने की अपनी गतिविधि को शारीरिक फिटनेस पर केंद्रित करने के बजाय, मैंने तनाव से राहत के लिए चलना शुरू कर दिया। इससे मेरी नींद में सुधार हुआ, मेरे सिर में दर्द कम हुआ और मैं बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकी।हालाँकि मेरा परिवार एक नई दिनचर्या में वापस आ रहा है, फिर भी मैं चलना जारी रखूंगी, यहाँ तक कि फ़ोन मीटिंग के दौरान और ठंड के मौसम में भी। कभी-कभी मैं गाड़ी चलाने के बजाय कामों के लिए पैदल चल देती हूं।

क्या मैं सुधार कर रहा हूँ

मैं प्रकृति से अधिक जुड़ा हुआ महसूस करती हूं, और ताजा हवा का आनंद लेती हूं। भारोत्तोलन को एक मजबूत आदत बनानाएलिसन फिलिप्स, मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर, आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी मैंने ताकत बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए महामारी के दौरान वजन उठाने का फैसला किया। एक स्वास्थ्य मनोवैज्ञानिक के रूप में मुझे पहले से ही पता था कि मुझे क्या करना है।जब कार्डियो गतिविधि की बात आती है, तो मुझे महामारी से कई साल पहले से ही एक आदत थी। हर दिन, रात के खाने से पहले, मैं कुछ ऐसा करता जो कार्डियो के रूप में मायने रखता है। महामारी के दौरान, मेरी दिनचर्या में टहलना या स्टेप वीडियो करना शामिल है। मुझे पता था कि एक नई आदत बनाने का एक तरीका मौजूदा आदत से जोड़ना है, इसलिए मैंने अपने कार्डियो सत्र के बाद वजन उठाने की योजना बनाई। सप्ताह में चार बार, मैं बारी-बारी से हाथों और पैरों को प्रतिरोध प्रशिक्षण देता।लेकिन वज़न उठाना मज़ेदार नहीं था, यह पहली बार में अच्छा नहीं लगा, और मैं यह नहीं बता सकता था कि क्या मैं सुधार कर रहा हूँ।

यह मेरी पहचान का हिस्सा था

मैंने एक कैलेंडर पर अपने वेट वर्कआउट पर नज़र रखी, और 2020 के अधिकांश समय के लिए, यही एकमात्र इनाम था जिसे मैंने महसूस किया – उपलब्धि की भावना और कागज के एक टुकड़े पर एक चेक मार्क। आखिरकार, महीनों के अर्ध-नियमित भारोत्तोलन के बाद, मैं इसे कुछ ऐसी चीज के रूप में देखने लगा, जिसे मैं महत्व देता था।इस नापसंद गतिविधि को अपनाने का मेरा इनाम क्या था? मैं और अधिक टोंड और फिट हो गया, निश्चित रूप से। और यह मेरी पहचान का हिस्सा था और कुछ ऐसा था जिस पर मुझे इस महामारी के दौरान गर्व हो सकता था। कार्डियो करने के बाद अगर मैंने वेट नहीं उठाया, तो मेरा शरीर अनुपयोगी महसूस कर रहा था।सभी आदतें, अच्छी या बुरी, आदत बनने के लिए एक समान प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। आमतौर पर, इसमें एक परिचित संदर्भ में दोहराव शामिल होता है, जिसे व्यवहार के लिए एक इनाम के साथ जोड़ा जाता है।

तब तक छोटे-छोटे लालच ठीक हैं

जिसे मैं वज़न उठाने की आदत कहूंगा, उसे विकसित करने में मुझे पूरा एक साल लग गया। अब, जब मेरा संदर्भ बदल जाता है – जैसे टीकाकरण के बाद जिम लौटना या काम या छुट्टियों के लिए यात्रा करना – मेरा शरीर मांसपेशियों के काम की अपेक्षा करता है और उसकी आवश्यकता होती है, और मुझे किसी प्रकार का प्रतिरोध प्रशिक्षण करने का एक तरीका मिल जाता है।छोटे लालच, संयम जरूरीकैथरीन बसबाम, क्लिनिकल डाइटिशियन, वर्जीनिया विश्वविद्यालय एक पंजीकृत आहार विशेषज्ञ के रूप में, मैंने हमेशा ‘‘सभी खाद्य पदार्थ फिट’’ मानसिकता को बढ़ावा दिया है और उसका पालन किया है। इसका मतलब यह है कि, जब तक आपका अधिकांश भोजन और नाश्ता पौष्टिक खाद्य पदार्थों से तैयार किया जाता है, तब तक छोटे-छोटे लालच ठीक हैं।जहां तक मुझे याद है, चॉकलेट उन छोटे लालच में से एक रहा है जो मुझे पसंद है। महामारी से पहले, मेरी चॉकलेट की आदत में सुबह कॉफी के साथ एक छोटा टुकड़ा शामिल था, दिन के दौरान कोई भी नहीं, क्योंकि मैं 9 से 5 तक अस्पताल में ड्यूटी पर रहती थी, और फिर रात के खाने के बाद एक टुकड़ा और।लेकिन जब महामारी शुरू हुई और मैंने प्रति सप्ताह कुछ दिन घर पर काम करना शुरू किया, तो मेरी दिनचर्या में काफी बदलाव आया, जिसमें मेरी खाने की आदत भी शामिल थी। मैंने घर से काम करने के दिनों में भी तीन बार ज्यादातर संतुलित भोजन किया, लेकिन एक नई आदत भी सामने आई।

चूंकि मैं बार बार स्टोर नहीं जा पाती थी

मेरी चॉकलेट की खपत, एक बार सुबह और शाम से बढ़ गई, कभी-कभी तीन गुना। ऐसा इसलिए है क्योंकि चॉकलेट हमेशा वहीं थी, पूरे दिन आसानी से उपलब्ध थी।जब मुझे एहसास हुआ कि मेरी आदत नियंत्रण से बाहर हो गई है, तो मैंने चॉकलेट के बड़े बैग खरीदना बंद कर दिया। इसके बजाय, मैंने बहुत छोटा पैकेट खरीदना शुरू किया। चूंकि मैं बार बार स्टोर नहीं जा पाती थी इसलिए मैंने उसी पैकेट से रोज थोड़ा थोड़ा खाकर उसे हफ्ता भर चलाना शुरू किया और इस तरह एक खराब आदत से जान छुड़ाई। अब भले ही मैं अस्पताल में व्यक्तिगत रूप से काम करने वापस आ गई हूं, मैं चॉकलेट के बड़े बैग पर वापस नहीं गई हूं। मेरे लिए छोटा पैकेट ही ठीक है। ध्यान के माध्यम से मन की सफाईजेसिका बैन रॉबर्ट, राइटिंग एंड माइंडफुलनेस इंस्ट्रक्टर, क्लार्क यूनिवर्सिटी मैंने आठ साल तक क्लार्क यूनिवर्सिटी में माइंडफुल चॉइस नामक एक कोर्स पढ़ाया है, इसलिए कोई सोच सकता है कि मैंने अब से पहले लगातार ध्यान अभ्यास किया होगा।नहीं मैंने तब तक ऐसा नहीं किया था, जब तक कि महामारी में मुझे दैनिक ध्यान करने के लिए समय और मानसिक स्थान नहीं मिल गया।

दूसरों के प्रति पूर्वाग्रह को कम कर सकता है

मार्च 2020 से, दिन में कम से कम एक बार, मैंने अपने मन को शांत करने के लिए सांस पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया और इस काम के लिए दस मिनट निर्धारित किए। तब से, मेरा रक्तचाप गिर गया है – लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मैंने अधिक शांति का अनुभव किया है। मुझे नकारात्मक विचारों और भावनाओं से लगाव कम होने लगा क्योंकि अब मैं दरअसल सकारात्मक पर रहने और टिकने में सक्षम हूं। इसके अलावा, ध्यान ने मेरे ध्यान और ‘‘कार्यशील स्मृति’’ में सुधार किया है। शोध बताते हैं कि प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट ध्यान करने से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। ध्यान करने के लिए समय निकालना कुछ को मुश्किल लग सकता है, लेकिन शोध से पता चलता है कि यह दूसरों के प्रति पूर्वाग्रह को कम कर सकता है और साथ ही परिस्थितियों में नकारात्मक खोजने की अपनी प्रवृत्ति को कम कर सकता है, जिसे नकारात्मकता पूर्वाग्रह कहा जाता है।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password