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Mayana Kollai Temple Accident: तमिलनाडु के वेल्लोर में मयाना कोल्लई उत्सव के दौरान 60 फींट ऊंचा मंदिर रथ असंतुलित हो कर पलट गय़ा। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। कई लोगों के घायल होने की खबर है। देर रात निकाली जा रही शोभा यात्रा अचानक मातम में बदल गई, मंदिर रथ असंतुलित हो कर नीचे चल रहे लोगों पर गिर गया।
उत्सव के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
हादसा मायाना कोल्लई उत्सव के दौरान 16 फरवरी की रात को हुआ, जो महाशिवरात्रि के अगले दिन मनाया जाता है। उत्सव के दौरान हजारों श्रद्धालु देवी की शोभा यात्रा देखने के लिए सड़को पर मौजूद थे। इसी दौरान गांवों से लाए गए देवी-देवताओं के रथों में से एक विसाल रथ अचानक संतुलन खो बैठा और सड़ पर गिर पड़ा।
घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, राहत एवं बचाव दल और स्थानीय लोगों ने मलबे में फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया। प्रशासन ने पुष्टि कि है कि हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं।
मायाना कोल्लई की परंपरा और मान्यता
मायाना कोल्लई उस्तव मायाना कोल्लई से जुड़ा एक प्राचीन धार्मिक आयोजन है, जिसमें देवी की मूर्तियों को सजे हुए रथों में श्मशान या कब्रिस्तान तक ले जाया जाता है। लोक मान्यता के अनुसार देवी पार्वती ने इसी स्थान पर एक राक्षस का वध किया था। एक अन्य कथा के अनुसार देवी ने भगवान शिव को देवी सरस्वती के श्राप में मुक्त कराया था।
इस उत्सव में कोल्लई नामक विशेष अनुष्ठान होता है, जिसमें श्रद्धालु देवी की ओर भोजन सामग्री फेंकते हैं। लोगों को विश्वास है कि इस दिन मांगी गई मुरादें अगले साल तक पूरी होती है। कई भक्त देवी का रूप धारण कर मुखौटे पहनते हैं और भक्ति नृत्य करते हैं।
नदी किनारे आयोजित होता है भव्य आयोजन
इस उत्सव का आयोजन पलर नदीं के तट पर किया जाता है। ये वेल्लोर जिले के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनो में गिना जाता है। इस साल करीब 10 गांवों से देवी-देवताओं को रथों पर बैठाकर नदीं किनारे ले जाया गया था। हादसे के बाद कझिंजुर गांव के लोगों ने गिरे हुए रथ से देवी की मूर्ति को सुरक्षित बाहर निकाल कर गांव वापस पहुंचाया।
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सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
अधिकारियों के अनुसार सरकारी नियमों में मंदिर रथों की अधिकतम ऊंचाई 12 फीट तय है, लेकिन मायाना कोल्लई उत्सव के दौरान विरुधमबट्टू, कझिंजूर और मोट्टूर गांवों के रथ 60 फीट तक ऊंचे बनाए जाते हैं। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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गौरतलब है कि वर्ष 2023 में भी इसी उत्सव के दौरान मोट्टूर गांव का रथ Anna Bridge के पास पलार नदी में गिर गया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बाद अब स्थानीय लोग और प्रशासन बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा नियमों के सख्त पालन की मांग कर रहे हैं।
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