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Dr Kumar Vishwas: हिन्दी कविता को युवाओं की धड़कन बनाने वाले और कोई दीवाना कहता है जैसी कालजयी रचना के रचयिता डॉ. कुमार विश्वास आज भारतीय साहित्य जगत का सबसे बड़ा नाम बन चुके हैं। पिलखुआ की गलियों से निकलकर वैश्विक मंचों तक पहुंचने का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
कॉलेज प्रोफेसर के रूप में करियर की शुरुआत
डॉ. विश्वास ने अपने करियर की शुरुआत 1994 में एक प्रोफेसर के रूप में की थी। रिपोर्ट के अनुसार, यहां उन्हें करीब 2 हजार रुपए महीने की सैलरी के रूप में मिलता था। हालांकि, फिर उन्होंने काव्य क्षेत्र में कदम रखा और 90 के दशक से शुरू हुआ उनका यह सफर आज अपने-अपने राम जैसे व्याख्यान और कथाओं तक पहुंच चुका है।
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अमेठी से एमपी चुनाव लड़ा, अभी राजनीति से दूर
साल 2012 से उनका राजनीकि सफर शुरू हुआ था, लेकिन ज्यादा समय तक वह राजनीति में टीक नहीं पाए। वे आम आदमी पार्टी (AAP) के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे और 2014 में अमेठी से लोकसभा चुनाव भी लड़ा। करीब 2015 तक वे राजनीति में एक्टिव रहे, हालांकि फिर उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली और और अब वे साहित्यिक सफर पर हैं।
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करीब 40 करोड़ की संपत्ति, फॉर्च्यूनर जैसी कारें
2014 के लोकसभा चुनाव में दिए हलफनामे के मुताबिक, उस वक्त उनकी संपत्ति 3.80 करोड़ रुपए संपत्ति थी, जिसमें गाजियाबाद के पिलखुआ में एक घर की कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आंकी गई थी। ऋषिकेश में उनके दो फ्लैट की कीमत 90 लाख रुपए और 12 लाख रुपए थी। उनके पास टोयोटा इनोवा और टाटा एरिया जैसी कारें थी हैं। जिनकी कुल कीमत लगभग 16.50 लाख रुपए आंकी थी।
सोशल मीडिया से भी बड़ी कमाई करते हैं विश्वास
वर्तमान में उनकी संपत्ति के सटीके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी अनुमानित कुल संपत्ति करीब ₹30 से 40 करोड़ रुपए हो सकती हैं। उनकी आय के मुख्य स्त्रोत कवि सम्मेलन, रामकथा, व्याख्यान के अलावा YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी उनकी आय का एक बड़ा जरिया है।
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देश में 25 तो विदेशों में 50 लाख तक लेते हैं फीस
डॉ. कुमार विश्वास आज भारत के सबसे महंगे कवियों और वक्ताओं में शुमार हैं। वे भारत में एक कवि सम्मेलन के करीब ₹8 लाख से ₹15 लाख तक चार्ज करते हैं। जबकि रामकथा और विशेष व्याख्यान के लिए ₹15 से 25 लाख, जबकि विदेशों में जैसे USA और UK में ₹30 से 50 लाख रुपए तक फीस लेते हैं।
आधुनिक संदर्भों में रामायण से करा रहे परिचित
वर्तमान में डॉ. विश्वास पूरी तरह से साहित्यिक पुनर्जागरण के मिशन पर हैं। वे नियमित रूप से देशभर में अपने-अपने राम सत्र आयोजित कर रहे हैं, जहां वे युवा पीढ़ी को आधुनिक संदर्भों में रामायण और भारतीय संस्कृति से परिचित कराते हैं। इसके साथ ही, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी सम्मेलनों का नेतृत्व भी कर रहे हैं।
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