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AI Future 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence- AI) के इतिहास में साल 2025 एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज किया गया। यह वह दौर रहा जब एआई प्रयोगशालाओं, डेमो प्रोजेक्ट्स और सीमित पायलट प्रोग्राम्स से निकलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था का सक्रिय हिस्सा बन गया। जैसे-जैसे दुनिया 2026 की ओर बढ़ रही है, एआई की भूमिका केवल टेक्स्ट और इमेज बनाने तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह एजेंटिक एआई (Agentic AI) और भौतिक एआई (Physical AI) के रूप में निर्णय लेने, मशीनों को नियंत्रित करने और वास्तविक दुनिया के कामकाज में गहराई से शामिल हो रहा है।
एआई का विकास अब केवल तकनीकी विषय नहीं रहा, बल्कि यह कॉर्पोरेट रणनीति, वैश्विक राजनीति, रोजगार, गोपनीयता और सामाजिक ढांचे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
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2020 से 2025 तक एआई का सफर
पिछले पांच सालों में एआई का विकास तेजी से हुआ है। साल 2020 में एआई मुख्य रूप से छोटे स्तर (Narrow AI) तक सीमित था, जो अनुवाद, इमेज पहचान और शतरंज जैसे सीमित कार्यों में दक्ष था। 2022 में लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (Large Language Models- LLMs) के आने से तस्वीर तेजी से बदलने लगी।
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2024 तक एआई ऐसे कार्य करने लगा, जिनमें मनुष्यों को घंटों लगते थे, जैसे कोड लिखना, कानूनी दस्तावेजों का विश्लेषण और रिसर्च रिपोर्ट तैयार करना। 2025 में एआई ने तर्क रिजनिंग के स्तर पर पहुंचा। गूगल (Google) के जेमिनी और ओपनएआई (OpenAI) के उन्नत मॉडल्स ने यह दिखाया कि एआई अब उत्तर देने से पहले सोचने की क्षमता विकसित कर रहा है। नवंबर 2025 तक लगभग 79 प्रतिशत वैश्विक संगठनों ने किसी न किसी रूप में जनरेटिव एआई (Generative AI) को अपनाया, जिसमें अब बहुत तेजी से बढ़ेतरी हो रही है।
एआई बनाम एजीआई (AI vs AGI)
2026 में एआई क्षेत्र की सबसे अहम बहस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (Artificial General Intelligence- AGI) को लेकर है। वर्तमान एआई सिस्टम्स कई विशेष कामों में माहिर हैं, जबकि एजीआई ऐसी बुद्धिमत्ता मानी जाती है, जो मानव की तरह किसी भी कॉग्निटिव काम (Cognitive Task) को कर सके। उसमें इंसानों की तरह सोच पाने की क्षमता हो। इसे लेकर बड़ी टेक कंपनियों में बहुत ऊंचे स्तर पर प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है।
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ओपनएआई, गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी कंपनियां एजीआई की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन पहले ही कह चुके हैं कि एजीआई का रास्ता अब साफ दिखाई देने लगा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक दुनिया ऊंचे और समृद्ध स्तर के एआई तक तो पहुंच सकती है, लेकिन पूर्ण एजीआई अभी भी कुछ साल दूर है।
बड़ी टेक कंपनियों में आगे निकलने की होड़
साल 2025 में एआई सेक्टर में निवेश का अभूतपूर्व दौर चल रहा है और यह साल 2026 में भी जारी रहेगा। माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), गूगल, अमेजन (Amazon) और मेटा (Meta) जैसी कंपनियां डेटा सेंटर (Data Center), क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) और एआई मॉडल्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं।
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माइक्रोसॉफ्ट एआई से सीधे रेवेन्यू कमाने में सबसे आगे है। उसकी कोपायलट एआई (Copilot AI) सेवाओं से सालाना करीब 13 बिलियन डॉलर का एआई राजस्व सामने आ चुका है। गूगल एआई आधारित सर्च और जेमिनी इकोसिस्टम पर फोकस कर रहा है, जबकि मेटा ओपन-सोर्स (Open Source) मॉडल लामा (LLaMA) के जरिए इनडायरेक्ट रूप से विज्ञापन कारोबार मजबूत कर रहा है।
अमेजन ने साल 2025-26 में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100 बिलियन डॉलर से अधिक निवेश की योजना बनाई है, जिससे उसकी AWS (Amazon Web Services) सेवाओं को बढ़त मिल सके।
एआई के चिप्स बनाने में एनवीडिया कोसों आगे
एआई क्रांति की रीढ़ सेमीकंडक्टर (Semiconductor) चिप्स हैं। साल 2025 तक एनवीडिया (NVIDIA) का एआई चिप बाजार में दबदबा लगभग एकाधिकार जैसा हो गया है। एआई ट्रेनिंग में उपयोग होने वाले जीपीयू (GPU) बाजार का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा एनवीडिया के पास है।
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हालांकि साल 2026 में इस वर्चस्व को चुनौती मिलने की उम्मीद है। गूगल अपने टीपीयू (TPU) चिप्स पर निर्भरता बढ़ा रहा है। इंटेल (Intel) और एएमडी (AMD) भी नई पीढ़ी की एआई चिप्स के साथ बाजार में उतर रहे हैं। इसके अलावा सेरेब्रास (Cerebras) जैसे स्टार्टअप्स ऐसे चिप्स ला रहे हैं जो पारंपरिक जीपीयू से कई गुना तेज होने का दावा करते हैं।
एआई के जरिए तैयार हो रही रोबोटिक्स की दुनिया
साल 2026 वह साल माना जा रहा है, जब एआई डिजिटल दुनिया से निकलकर भौतिक दुनिया में बड़े पैमाने पर दिखाई देगा। अमेजन पहले ही अपने गोदामों में 10 लाख से ज्यादा रोबोट तैनात कर चुका है। टेस्ला (Tesla) का ऑप्टिमस (Optimus) और फिगर एआई (Figure AI) जैसे ह्यूमनॉइड रोबोट्स घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए विकसित किए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आम घरों में रोबोट्स का बड़े पैमाने पर उपयोग अभी भी चुनौती बना रहेगा। इसकी वजह लागत, सुरक्षा नियम और तकनीकी जटिलता है। रोबोट्स को व्यावहारिक ज्ञान और कुशलता पाने में अभी समय लगेगा।
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ड्राइवरलेस कारों का बढ़ेगा क्रेज
ड्राइवरलेस वाहन (Autonomous Vehicles) साल 2026 में सबसे ज्यादा चर्चा में रहेंगे। अमेरिका में वेमो (Waymo) जैसी कंपनियां 25 शहरों तक रोबोट टैक्सी सेवा विस्तार की योजना बना रही हैं। अनुमान है कि ये सेवाएं प्रति सप्ताह 10 लाख से ज्यादा यात्राएं कराएंगी। डेटा बताता है कि रोबोट टैक्सी मानव चालकों की तुलना में कम दुर्घटनाएं करती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का एक समूह चेतावनी दे रहा है कि एआई सिस्टम अप्रत्याशित परिस्थितियों में गलत निर्णय ले सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा को लेकर बहस तेज बनी हुई है। टेस्ला भी रोबोटैक्सी के मामले में बहुत तेजी से काम कर रही है और कई शहरों में इसकी शुरुआत भी कर चुकी है, जहां बिना ड्राइवर के ही कैब से आप कहीं भी आ-जा सकेंगे।
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अमेरिका की बढ़त बरकरार
एआई में वैश्विक नेतृत्व की दौड़ अब जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) स्वरूप ले चुकी है। अमेरिका फंडिंग, कंप्यूटिंग पॉवर और रिसर्च में सबसे आगे है। हालांकि, चीन बड़े पैमाने पर तैनाती और कम लागत वाले मॉडल्स के जरिए तेजी से अंतर कम कर रहा है। वहीं, भारत एआई टैलेंट पूल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर तीसरे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर स्वदेशी एआई पर जोर दे रहे हैं, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो सके।
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साल 2026 में एआई के खतरे
साल 2026 में एआई को लेकर कई जोखिम भी सामने हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि उच्च गुणवत्ता वाले डेटा की कमी से एआई विकास की गति धीमी पड़ सकती है। निवेश का बुलबुला (Investment Bubble) फूटने की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि कई कंपनियों का एआई से रिटर्न अभी स्पष्ट नहीं है। कंपनियों के पास इसका स्पष्ट नहीं है कि आने वाले समय में वो एआई से वो कैसे रेवेन्यू कैसे जेनेरेट करेंगी। ऐसे में एआई के बुलबुले की फूटने की भी आशंका जताई जा रही है, जो साल 2000 के दौर में डॉट कॉम (.com) बबल के साथ हुआ था।
वहीं, कर्मचारियों की निगरानी के जरिए एआई ट्रेनिंग, प्राइवेसी (Privacy) उल्लंघन, डीपफेक (Deepfake) और साइबर अपराध जैसे खतरे भी बढ़ रहे हैं। सबसे बढ़ा खतरा यह भी है। वहीं, भारत और कई विकसित देशों में एआई को लेकर उचित नियम और कानून की पारदर्शिता में कमी दिख रही है।
साल 2026 एआई के लिए मैच्योरिटी का साल माना जा रहा है। यह तय करेगा कि एआई वास्तव में वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता रखता है या नहीं। तकनीकी उन्नति के साथ-साथ सामाजिक, कानूनी और नैतिक संतुलन बनाए रखना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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