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Chhindwara Cough Syrup Case: लापरवाही + देरी = 14 मासूम बच्चों की मौत..! जानें एक्शन लेने में क्यों लगे इतने दिन ?

Chhindwara Cough Syrup Case: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत के बाद सामने आया कफ सिरप कांड अब पूरे प्रदेश में चिंता का विषय बन चुका है।

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sanjay warude
Chhindwara Cough Syrup Case

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Chhindwara Cough Syrup Case: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत के बाद सामने आया कफ सिरप कांड अब पूरे प्रदेश में चिंता का विषय बन चुका है।

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प्रदेश पुलिस और प्रशासन की अलग-अलग जांच में हर दिन कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जिसके पीछे कई बड़े जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाहियां और देरी मुख्य कारण रहा है। जिसके बाद एक-एक कर करीब 12 बच्चों की मौतें होती गईं। इन सभी को इलाज के दौरा कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया था, जिसके बाद इनकी किडनी फेल होने से मौत होना बताया जा रहा हैं।

सितंबर में हुई थी शुरुआत, प्रशासन बेखबर

यह पूरा मामला सितंबर महीने से शुरू हो गया था। 2 सितंबर को परासिया क्षेत्र में 4 साल के शिवम राठौड़ की मौत हुई थी। हालांंकि, इसके बाद 15 दिन में और 6 बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो गई, जिसके बाद प्रशासन को कुछ गंभीर गड़बड़ी का अंदेशा हुआ था।

नागपुर से पता चला था कोल्ड्रिफ में जहर

20 सितंबर को आनन-फानन में परासिया सिविल अस्पताल में शिशुओं के लिए अलग वार्ड बनाया गया, लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। जिन चार बच्चों को नागपुर रेफर किया गया, उनकी किडनी बायोप्सी रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि नुकसान कफ सिरप में मौजूद रासायनिक तत्व के कारण हुआ है। सभी बच्चों को एक ही सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ दी गई थी।

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कोल्ड्रिफ बैन में देरी, फिर भी बिकती रही

रिपोर्ट आने के बाद 29 सितंबर को प्रशासन ने ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप पर प्रतिबंध लगाया, लेकिन यह रोक केवल छिंदवाड़ा जिले तक सीमित रही। जबलपुर से लगातार सिरप का सप्लाई जारी रहा। परासिया सिविल अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ अपने निजी क्लीनिक से डॉ प्रवीण सोनी कोल्ड्रिफ सिरप लिखते रहे। पास में अपनी पत्नी ज्योति सोनी की मेडिकल से बैन कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री जारी रही।

धीमी जांच और दशहरा छुट्टी पर लैब बंद

30 सितंबर को संदिग्ध दवाओं ‘कोल्ड्रिफ’ और ‘नेक्स्ट्रो-डीएस’ के सैंपल भोपाल की ड्रग लेबोरेटरी भेजे गए। लैब में इनकी जांच छोड़ अन्य सामान्य दवाओं की जांच कर 1 अक्टूबर को रिपोर्ट “सही” बताई गई। इसी बीच दशहरे की छुट्टी के कारण लैब बंद रही।

गंभीर होते तो ड्रग कंट्रोलर नहीं जाते तीर्थ

1 अक्टूबर को मध्य प्रदेश ड्रग कंट्रोलर शोभित कोष्टा ने तमिलनाडु सरकार को एक पत्र भेजा और श्रीसन कंपनी की जांच का अनुरोध किया। हालांकि, उन्होंने इस मामले को इतनी गंभीरता नहीं दिखाई, क्योंकि इसके तुरंत बाद स्टेट डिप्टी ड्रग कंट्रोलर छुट्टी लेकर रामेश्वरम तीर्थयात्रा पर निकल गए।

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तमिलनाडु में एक्शन से जागी MP सरकार

2 अक्टूबर को गांधी जयंती की छुट्टी के दिन तमिलनाडु की सरकारी टीम ने श्रीसन कंपनी पर छापा मारा और कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सैंपल की लैब में जांच कराई, जिसमें 0ण्1 की जगह 46.2% डायएथिलीन ग्लाइकॉल मिला। ये खबर फैलने के बाद मध्यप्रदेश सरकार जागा।

तमिनलाडु की रिपोर्ट ने खोली सच्चाई

तमिलनाडु सरकार की जांच रिपोर्ट के बाद 4 अक्टूबर की देर रात भोपाल लैब ने अपनी रिपोर्ट जारी की। इसमें ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप में 46.2% डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया, जो अत्यंत विषैला तत्व है। जबकि ‘नेक्स्ट्रो-डीएस’ और ‘मेफटॉल-पी’ सिरप को मानक गुणवत्ता वाला पाया गया।

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Chhindwara Cough Syrup Case: चाइल्ड स्पेशलिस्ट सस्पेंड, दम तोड़ चुके 7 बच्चों का अपने निजी क्लीनिक पर किया था इलाज

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Chhindwara Cough Syrup Case Update: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया सिविल अस्पताल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ प्रवीण सोनी को सस्पेंड कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...

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