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सूरजपुर न्यूज: ब्रेड फैक्ट्री में काम कर रहे 8 संदिग्ध हिरासत में, बांग्लादेशी होने की आशंका, 4 नाबालिग शामिल

सूरजपुर के पतरापारा स्थित ब्रेड फैक्ट्री से पुलिस ने 8 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनमें 4 नाबालिग हैं। स्थानीय लोगों की सूचना पर कार्रवाई हुई। पुलिस को इनके बांग्लादेशी होने की आशंका है और फैक्ट्री संचालक की भूमिका की भी जांच चल रही है।

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Shashank Kumar
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Surajpur News: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ पतरापारा क्षेत्र में संचालित एक ब्रेड फैक्ट्री में काम कर रहे 8 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन सभी पर बांग्लादेशी नागरिक होने का संदेह जताया जा रहा है। पकड़े गए लोगों में चार नाबालिग भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

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बोलचाल और गतिविधियों से पैदा हुआ शक

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से ब्रेड फैक्ट्री में कुछ बाहरी युवक काम कर रहे थे, जिनकी बोलचाल और व्यवहार स्थानीय भाषा व रहन-सहन से मेल नहीं खाता था। इसी कारण मोहल्ले के लोगों को उन पर शक हुआ। लोगों ने इस संदर्भ में बजरंग दल को सूचना दी, जिसके बाद संगठन ने तत्काल पुलिस को मामले से अवगत कराया।

कोतवाली पुलिस की दबिश, जांच जारी

सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम ने फैक्ट्री में दबिश दी और मौके से 8 लोगों को हिरासत में लिया। इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए एडिशनल एसपी संतोष कुमार महतो ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कुछ लोगों के आधार कार्ड पश्चिम बंगाल के पाए गए हैं, जबकि कुछ के पास कोई वैध पहचान दस्तावेज नहीं मिले हैं। पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है और उनके मूल निवास, फैक्ट्री में काम करने का कारण और यहां आने के रास्ते की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके लिए अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।

फैक्ट्री संचालक की भूमिका पर सवाल

इस कार्रवाई के बाद ब्रेड फैक्ट्री संचालक की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बिना उचित पहचान पत्र और पुलिस वेरिफिकेशन के इन लोगों को रोजगार कैसे दिया गया। यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।

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बजरंग दल ने उठाए प्रशासन पर सवाल

घटना के बाद बजरंग दल के पदाधिकारी दिनेश साहू ने कहा कि यह मामला प्रशासनिक सतर्कता पर भी सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि बाहरी लोग कई महीनों से जिले में रह रहे थे, तो पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली। स्थानीय लोगों को खुद आगे आकर सूचना देनी पड़ी, जो व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। हिरासत में लिए गए सभी लोगों से पूछताछ जारी है और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि वे वास्तव में बांग्लादेशी नागरिक हैं या किसी अन्य राज्य से आए मजदूर।

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