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CG ACB Action: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी दफ्तर में बैठा एक लिपिक अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करते हुए रिश्वतखोरी की सारी हदें पार करता नजर आया। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड–2 के लिपिक गिरीश कुमार वारे को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।
ट्रांसफर के नाम पर मांगी मोटी रकम
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जानकारी के अनुसार आरोपी लिपिक ने विभाग में कार्यरत एक भृत्य यानी चपरासी के तबादले के बदले 80 हजार रुपये की मांग की थी। पीड़ित कर्मचारी मजबूरी में पहले ही 30 हजार रुपये दे चुका था। इसके बावजूद लिपिक की लालच कम नहीं हुई और वह बाकी 50 हजार रुपये की लगातार मांग करता रहा। पीड़ित का कहना है कि उसके पास और पैसे देने की क्षमता नहीं थी, लेकिन लिपिक उस पर दबाव बनाता रहा।
रिश्वत नहीं दी तो बाइक जब्त कर ली
आरोप है कि जब चपरासी बाकी रकम नहीं दे पाया, तो लिपिक ने दबंगई दिखाते हुए उसकी पल्सर बाइक जबरन अपने पास रख ली। यह घटना पीड़ित के लिए न सिर्फ मानसिक प्रताड़ना बनी, बल्कि आर्थिक रूप से भी उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा। एक सरकारी कर्मचारी से इस तरह का व्यवहार सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
ACB से की शिकायत, रची गई पूरी योजना
इस पूरे घटनाक्रम से परेशान होकर पीड़ित कर्मचारी ने एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के बाद ACB ने पूरे मामले को सही पाया और आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को शेष रिश्वत की रकम दी गई और अपनी बाइक वापस लेने के बहाने लिपिक के पास भेजा गया।
रंगे हाथ गिरफ्तारी, पूछताछ जारी
जैसे ही लिपिक ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम ली, पहले से मौके पर तैनात ACB और पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ACB यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी पहले भी इस तरह के मामलों में शामिल तो नहीं रहा है और क्या विभाग में किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका भी सामने आ सकती है।
विभाग में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद जशपुर के महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल है। कर्मचारी सहमे हुए हैं और अधिकारी मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। ACB की इस कार्रवाई को आम लोगों और कर्मचारियों ने राहत देने वाला कदम बताया है। लोगों का कहना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
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