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बलरामपुर में अवैध उत्खनन कार्रवाई के दौरान बड़ा बवाल: SDM पर खेत से घर लौट रहे ग्रामीणों की पिटाई का आरोप, एक बुजुर्ग की मौत, गांव में तनाव

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। कुसमी थाना क्षेत्र के हंसपुर गांव में अवैध उत्खनन रोकने पहुंची टीम पर ग्रामीणों से बेरहमी से मारपीट का आरोप है।

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Harsh Verma
Balrampur Illegal Mining Action Controversy

Balrampur Illegal Mining Action Controversy: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रशासनिक कार्रवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब अवैध उत्खनन रोकने पहुंचे अधिकारियों पर ग्रामीणों के साथ बर्बर मारपीट का आरोप लगा। आरोप है कि एसडीएम करुण कुमार डहरिया और उनकी टीम की इस कार्रवाई में एक बुजुर्ग की जान चली गई, जबकि दो अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने पूरे जिले के प्रशासनिक तंत्र को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। मामला कुसमी थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत हंसपुर का है, जहां रविवार और सोमवार की दरमियानी रात यह घटना घटी।

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रात दो बजे हुई कार्रवाई

मिली जानकारी के अनुसार, रविवार देर रात करीब 2 बजे बलरामपुर के एसडीएम करुण कुमार डहरिया और सामरी के नायब तहसीलदार पारस शर्मा अपनी टीम के साथ बॉक्साइट के अवैध उत्खनन की सूचना पर निकले थे। आरोप है कि इसी दौरान खेत से अपने घर लौट रहे तीन ग्रामीण रामनरेश राम (62), अजीत उरांव (60) और आकाश अगरिया (20) को टीम ने रास्ते में रोक लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि अधिकारियों और उनके साथ मौजूद कर्मियों ने बिना किसी पूछताछ या पहचान के सीधे लाठी-डंडों से मारपीट शुरू कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि तीनों किसान हैं और उनका अवैध उत्खनन से कोई लेना-देना नहीं था।

अस्पताल पहुंचने से पहले बुजुर्ग की मौत

मारपीट इतनी गंभीर बताई जा रही है कि 62 वर्षीय रामनरेश राम ने अस्पताल ले जाते समय ही दम तोड़ दिया। वहीं अजीत उरांव और आकाश अगरिया की हालत नाजुक बनी हुई है और दोनों का इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना सच्चाई जाने निर्दोष लोगों को खनन माफिया समझ लिया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

प्रशासन पर उठे सवाल

इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या किसी प्रशासनिक अधिकारी को मौके पर कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है? यदि ग्रामीण संदिग्ध थे, तो उन्हें हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई?ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई और मीडिया को अस्पताल और थाने से दूर रखने का प्रयास हुआ, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।

घटना के बाद हंसपुर और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल है। हालात को काबू में रखने के लिए कुसमी क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

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“दोषी कोई भी हो, नहीं बख्शा जाएगा”

इस मामले पर बलरामपुर पुलिस अधीक्षक वैभव भयंकर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घायलों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एसपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

फिलहाल, पूरे जिले की नजर इस मामले की जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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