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बलरामपुर जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान झड़प: ग्रामीणों ने अधिकारियों के साथ की हाथापाई, वन विभाग ने कार्रवाई करने की कही बात

बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए विवाद ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

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Harsh Verma
Balrampur Encroachment Dispute

Balrampur Encroachment Dispute: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। मामला रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र का है, जहां वन विभाग की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और विभागीय अमले के बीच तीखी झड़प हुई। इस घटना के बाद अब वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी खुलकर सामने आ गए हैं और पूरे मामले में सख्त रुख अपनाने की बात कही जा रही है।

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रातोंरात हुआ अतिक्रमण

वन विभाग के अनुसार पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने रातोंरात वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया था। इस जमीन पर अस्थायी दुकानें और ढांचे खड़े कर दिए गए थे। जैसे ही इसकी सूचना विभाग को मिली, अतिक्रमण हटाने के लिए शनिवार को वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों और कानून के तहत की जा रही थी।

कार्रवाई के दौरान बढ़ा तनाव

अतिक्रमण हटाने की शुरुआत होते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते हालात बिगड़ गए और विवाद धक्का-मुक्की से होते हुए मारपीट में बदल गया। आरोप है कि इस दौरान रेंजर शिवनाथ ठाकुर सहित कई वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ हाथापाई की गई। करीब एक घंटे तक क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

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पुलिस की दखल से संभली स्थिति

स्थिति को बेकाबू होता देख पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस के पहुंचने और हस्तक्षेप के बाद हालात धीरे-धीरे शांत हुए। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और किसी भी तरह की नई अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। प्रशासन पूरे इलाके पर नजर बनाए हुए है।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के रेंजर शिवनाथ ठाकुर ने पहले उनसे पैसे लेकर वन भूमि पर कब्जा करवाया था और अब वही कब्जा हटाने की कार्रवाई कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जितना पैसा दिया जाता था, उतनी ही जमीन पर कब्जा दिलाया जाता था। इन्हीं दावों के आधार पर कई लोगों ने दुकानें और ढांचे खड़े किए थे।

वन विभाग का जवाब

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वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने स्पष्ट किया है कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान जिन लोगों ने झड़प, मारपीट और अभद्रता की है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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