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Bastar Pandum 2026: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आज ऐतिहासिक और उत्सवपूर्ण माहौल देखने को मिला, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ के संभाग स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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स्टॉलों का किया अवलोकन
मुख्य समारोह से पहले राष्ट्रपति ने सुबह 10:55 से 11:10 बजे तक बस्तर पंडुम में लगाए गए विभिन्न प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण किया। इन स्टॉलों में जनजातीय हस्तशिल्प, ढोकरा कला, कोसा शिल्प, पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था। राष्ट्रपति ने कलाकारों और शिल्पकारों से संवाद भी किया और उनके कार्यों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपति को ढोकरा आर्ट से बना ‘कर्मा वृक्ष’ और कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट किया।
“छत्तीसगढ़ आना घर जैसा लगता है”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें हमेशा घर जैसा अनुभव देता है। उन्होंने बस्तर की संस्कृति को प्राचीन और मधुर बताते हुए कहा कि यहां के लोग पंडुम को उत्सव की तरह जीते हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत पर्यटकों को आकर्षित करती है।
नक्सल मुक्त हो रहा है बस्तर
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में नक्सलवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों में नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासियों को काफी नुकसान हुआ है, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
उन्होंने हिंसा छोड़ने वालों का स्वागत करते हुए कहा कि जो लोग युवाओं को भटकाने की कोशिश करते हैं, उनकी बातों में नहीं आना चाहिए।
“पंडुम केवल आयोजन नहीं, संस्कृति का मंच”
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मां दंतेश्वरी की पावन भूमि पर राष्ट्रपति का आगमन पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा आमंत्रण स्वीकार करने पर प्रदेश की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समर्पित एक मंच है। बस्तर जंगलों की धरती ही नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भूमि है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनजातियों द्वारा पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र और वेशभूषा की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक धुनों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
‘बस्तर पंडुम’ के जरिए राज्य सरकार बस्तर की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने का प्रयास कर रही है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से इस आयोजन को विशेष महत्व मिला है।
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