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पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड की नजूल जमीन मामले में बड़ा आदेश: राजस्व मंडल ने एक महीने तक भूमि और अभिलेख यथावत रखने के निर्देश दिए

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड की सिविल लाइन क्षेत्र की जमीनों की खरीद-बिक्री से जुड़े मामले में राजस्व मंडल ने अहम आदेश पारित किया है।

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Harsh Verma
Vivek Dhand Land Case

Vivek Dhand Land Case: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित नजूल जमीनों को लेकर चल रहे विवाद में अब राजस्व मंडल छत्तीसगढ़ ने अहम कदम उठाया है। पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड और उनके परिवार से जुड़ी जमीनों की खरीद-बिक्री के मामले में मंडल ने अगला एक महीना यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल जमीन की स्थिति और उससे जुड़े सभी राजस्व रिकॉर्ड में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

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याचिका के बाद बढ़ी हलचल

इस पूरे मामले में आवेदक नारायण लाल शर्मा ने राजस्व मंडल में याचिका दायर की है। याचिका में सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। आवेदक का कहना है कि यह जमीन पूर्व मुख्य सचिव और उनके परिवार को नियमों के तहत केवल आवासीय उपयोग के लिए दी गई थी, लेकिन इसके बाद इसमें कई तरह की अनियमितताएं हुईं।

1964 में हुआ था आवंटन

याचिका के अनुसार, सिविल लाइन के मुख्य मार्ग पर स्थित करीब 1 लाख 53 हजार वर्ग फीट नजूल भूमि वर्ष 1964 में विवेक ढांड के परिवार को आवासीय पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। शिकायत में यह भी बताया गया है कि उस समय इस जमीन की रजिस्ट्री लगभग 1 लाख 23 हजार रुपये में हुई थी। आवेदक का आरोप है कि बाद में इस जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम स्थानांतरित किया गया।

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जमीन के टुकड़ों में बंटवारे पर सवाल

शिकायत के मुताबिक, मूल भूमि को 58 हजार, 37 हजार और 23 हजार वर्ग फीट सहित अन्य हिस्सों में विभाजित किया गया। इन टुकड़ों को ढांड परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम पर ट्रांसफर किया गया, जिसे नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि नजूल भूमि के ऐसे विभाजन और हस्तांतरण की अनुमति नियमों में नहीं है।

व्यावसायिक उपयोग का भी आरोप

आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि आवासीय पट्टे पर दी गई इस जमीन का व्यावसायिक उपयोग किया गया, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा नहीं किया जा सकता। शिकायत में कहा गया है कि पूर्व सीएस ने पिछली भूपेश बघेल सरकार की फ्रीहोल्ड नीति का लाभ उठाकर इस जमीन को फ्रीहोल्ड कराया, जिसमें गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।

फ्रीहोल्ड नीति रद्द होने का हवाला

याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की फ्रीहोल्ड नीति को निरस्त कर दिया है और उससे जुड़ी अनियमितताओं की जांच चल रही है। उन्हें जानकारी मिली है कि पूर्व मुख्य सचिव द्वारा इस जमीन को बेचने की कोशिश की जा रही है, इसी वजह से तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।

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फिलहाल यथास्थिति का आदेश

मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद राजस्व मंडल अध्यक्ष ने जमीन और उससे जुड़े सभी राजस्व अभिलेखों को यथावत रखने का आदेश दिया है। अब इस प्रकरण में आगे की सुनवाई के दौरान तय होगा कि नजूल भूमि के फ्रीहोल्ड और उपयोग से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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