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छत्तीसगढ़ मेडिकल कॉलेजों में खाली हैं सीटें: विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने दी जानकारी, प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के इतने पद रिक्त

छत्तीसगढ़ विधानसभा में मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों को लेकर सवाल उठा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में कुल 481 पद खाली हैं।

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Harsh Verma
Chhattisgarh Medical College Vacancy

Chhattisgarh Medical College Vacancy: छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Legislative Assembly) में आज प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों (Medical Colleges) में रिक्त पदों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक इंद्र कुमार साहू (Indra Kumar Sahu) ने सवाल करते हुए पूछा कि प्रदेश में संचालित मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापक (Professor) और सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के कितने पद स्वीकृत हैं और उनमें से कितने खाली पड़े हैं।

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उन्होंने विषयवार और महाविद्यालयवार जानकारी भी मांगी। साथ ही वर्ष 2015 से 2025 के बीच लोक सेवा आयोग (Public Service Commission - PSC) के माध्यम से हुई भर्तियों का विवरण भी पूछा।

स्वास्थ्य मंत्री ने दी विस्तृत जानकारी

Chhattisgarh Assembly Budget Session: मेडिकल कॉलेजों में रिक्त हैं प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों के 481 पद, कांग्रेस विधायक के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने दी जानकारी…

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल (Shyam Bihari Jaiswal) ने सदन में जवाब देते हुए बताया कि प्रदेश में सहायक प्राध्यापक के कुल 673 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 361 पद रिक्त हैं। वहीं प्राध्यापक के 224 स्वीकृत पदों में से 120 पद खाली हैं।

इस प्रकार कुल मिलाकर 481 पद वर्तमान में रिक्त हैं, जो चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं।

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भर्ती और परिवीक्षा का विवरण

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2015 से 2025 के बीच लोक सेवा आयोग के माध्यम से सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की गई है। इस अवधि में नियुक्त सहायक प्राध्यापकों में से 155 चिकित्सकों ने अपनी परिवीक्षा अवधि (Probation Period) पूरी कर ली है।

हालांकि, रिक्त पदों की संख्या अब भी अधिक है, जिससे मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

चिकित्सा शिक्षा पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। साथ ही मरीजों को विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने में भी दिक्कतें आती हैं। सदन में उठे इस सवाल के बाद अब सरकार पर इन रिक्त पदों को जल्द भरने का दबाव बढ़ गया है।

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