छत्तीसगढ़ में DMF फंड गड़बड़ी के आरोप पर केंद्र सरकार का संज्ञान: ननकीराम कंवर के पत्र पर मुख्य सचिव से मांगा जवाब, सियासत भी तेज

CG DMF Fund Irregularity: छत्तीसगढ़ में DMF फंड में कथित गड़बड़ी को लेकर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ननकीराम कंवर द्वारा लिखे गए पत्र पर केंद्र सरकार ने संज्ञान लिया है।

CG DMF Fund Irregularity

CG DMF Fund Irregularity: छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ फंड को लेकर उठे सवाल अब सीधे केंद्र सरकार तक पहुंच गए हैं। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ननकीराम कंवर ने डीएमएफ फंड में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव विकासशील को पत्र भेजकर मामले से जुड़े तथ्यों पर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता को भी की गई कार्रवाई से अवगत कराया जाए।

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कांग्रेस ने साधा भाजपा पर निशाना

मामले में सियासत भी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी अपने वरिष्ठ नेताओं को महत्व नहीं देती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा बुजुर्ग नेताओं को “म्यूजियम” में रखने का काम करती है। अमरजीत भगत ने कहा कि ननकीराम कंवर को यह समझ लेना चाहिए कि अब भाजपा उनकी नहीं रही और यह पार्टी की पुरानी रणनीति है।

भाजपा का पलटवार, जांच की बात

वहीं भाजपा की ओर से विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ननकीराम कंवर वरिष्ठ नेता हैं और वे भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए DMF घोटाले की शिकायत की गई है और वर्तमान सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। पुरंदर मिश्रा ने कहा कि हर घोटाले की जांच होगी और कांग्रेस इसलिए बेचैन है क्योंकि आरोप उनके शासनकाल से जुड़े हैं।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, ननकीराम कंवर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि दर्री ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक परसाभाटा बालको तक की सड़क के निर्माण के लिए तत्कालीन कलेक्टर अजीत बसंत द्वारा डीएमएफ फंड से करीब 26 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। उनका कहना है कि यह सड़क बालको कंपनी की है और इसका निर्माण या मरम्मत बालको के सीएसआर फंड से होना चाहिए था, न कि डीएमएफ फंड से।

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर का आरोप है कि जैसे ही तत्कालीन कलेक्टर को यह जानकारी मिली कि इस मामले की शिकायत भारत सरकार तक पहुंच गई है, उन्होंने अपने तबादले से पहले ही लोक निर्माण विभाग के जरिए आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी। इससे पूरे मामले पर और भी संदेह गहराता है।

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