रायपुर में भगवान 'राम' के अपमान का आरोप: DPI ने डीईओ को दोषी माना, NSUI ने कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावानी

छत्तीसगढ़ में कक्षा चौथी के इंग्लिश परीक्षा के पेपर में राम के नाम को आपत्तिजनक संदर्भ में इस्तेमाल करने पर सियासी घमासान तेज हो गया है। NSUI ने DEO के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने मामले में डीईओ को दोषी माना है।

Chhattisgarh Ram Nam Controversy

Chhattisgarh Ram Nam Controversy: छत्तीसगढ़ में कक्षा चौथी के इंग्लिश परीक्षा के पेपर में राम के पवित्र नाम को आपत्तिजनक संदर्भ में इस्तेमाल करने पर सियासी घमासान तेज हो गया है। NSUI का आरोप है कि पेपर में एक सवाल के विकल्पों में भगवान श्रीराम के नाम की तुलना कुत्ते के नाम से किए जाने जैसा आपत्तिजनक संदर्भ शामिल किया गया।

 NSUI ने सरकारी स्कूल की इस आपत्तिजनक शब्दावली को शर्मनाक और निंदनीय करार दिया है। रायपुर में इस मामले को लेकर NSUI ने जिला शिक्षा अधिकारी से जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

डीपीआई ने डीईओ को ठहराया दोषी

महासमुंद जिले में चौथी कक्षा की अर्द्धवार्षिक परीक्षा में उठे विवादास्पद प्रश्न पर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई ) ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को दोषी ठहराया है। डीपीआई  के सवाल पर डीईओ ने माना कि प्रश्नपत्र उनके द्वारा दिए गए प्रश्न पत्र की प्रति के मुताबिक नहीं छापा गया था, फिर भी उन्होंने परीक्षा से पहले सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

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सरकार स्कूल के कक्षा 4 का अंग्रेजी पेपर... जिसमें सवाल पूछा गया है व्हाट इज द नेम ऑफ मोनास डॉग ?

DEO ने माना गलती हुई, जांच कमेटी गठित

मामले को लेकर NSUI रायपुर ने बुधवार (7 जनवरी) को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान डीईओ हिमांशु भारतीय ने इसे विभागीय त्रुटि स्वीकार किया है और कहा कि शिक्षा विभाग से गलती हुई है।

उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जा रही है, जो एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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एनएसयूआई के कार्यकर्ता सरकारी स्कूल में कक्षा 4 की अर्धवार्षिक परीक्षा के अंग्रेजी पेपर में पूछ गए सवाल की फोटो प्रति दिखाते हुए।

बीजेपी सरकार पर साधा निशाना

NSUI ने इसे बीजेपी सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे लापरवाही और संवेदनहीन सोच का परिणाम बताया है। संगठन का कहना है कि एक ओर बीजेपी “रामराज्य” की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसके शासनकाल में बच्चों की परीक्षा में भगवान श्रीराम के नाम के साथ इस तरह की तुलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

NSUI ने कहा- यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं

NSUI रायपुर जिला अध्यक्ष शांतनु झा ने कहा, यह मामला केवल तकनीकी या मुद्रण संबंधी गलती नहीं है, बल्कि बीजेपी सरकार के संरक्षण में चल रही शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र बनाने से लेकर छपाई और वितरण तक पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की बनती है।

शांतनु ने आरोप लगाया कि “प्रिंटर की गलती” कहकर हर बार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब यह स्वीकार्य नहीं है।

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एनएसयूआई के कार्यकर्ता  डीईओ को ज्ञापन सौंपते हुए।

आंदोलन की चेतावनी

NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने, दोषियों को बचाने या सरकार की जिम्मेदारी से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई, तो संगठन प्रदेशव्यापी और उग्र आंदोलन करेगा।

NSUI कहा कि भगवान श्रीराम का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह पूरे सनातन समाज की आस्था से जुड़ा मामला है।

इस दौरान NSUI रायपुर जिला अध्यक्ष शांतनु झा, प्रदेश महासचिव निखिल बघेल, जिला महामंत्री सूरज साहू, जिला उपाध्यक्ष तारिक अनवर, जिला महासचिव संस्कार पांडे, विमल साहू, डिकेंद्र सिन्हा, देवेंद्र पाल, धनंजय पाल, देव, भूपेंद्र सहित बड़ी संख्या में NSUI कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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