Advertisment

रायपुर में डीएड अभ्यर्थियों का सब्र टूटा: सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर शिक्षा मंत्री का बंगला घेरा, खून से पत्र लिखकर लगाई गुहार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 को लेकर 24 दिसंबर से आमरण अनशन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों ने नियुक्ति नहीं मिलने पर स्कूल शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव कर दिया।

author-image
Harsh Verma
cg  (83)

Raipur D.Ed Candidates Protest: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों माहौल बेहद तनावपूर्ण है। लेकिन यह सियासी गर्मी किसी चुनावी मंच से नहीं, बल्कि अपने हक के लिए सड़क पर उतरे बेरोजगार युवाओं के आक्रोश से पैदा हुई है। सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले एक महीने से आमरण अनशन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों का बुधवार को सब्र जवाब दे गया।

Advertisment

24 दिसंबर से चल रहे अनशन के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं आने पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नवा रायपुर स्थित स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का घेराव करने पहुंच गए। अचानक उमड़ी भीड़ से पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और प्रदर्शनकारियों को बंगले के बाहर ही रोक दिया गया।

“सिर्फ बैठकों का खेल चल रहा है”

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा विभाग की हालिया समीक्षा बैठकों से उन्हें कोई उम्मीद नहीं दिख रही। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार नियुक्ति देने से बच रही है और सिर्फ फाइलों और बैठकों का खेल खेला जा रहा है। युवाओं का साफ कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि नियुक्ति पत्र चाहते हैं।

IAS-IPS पर सरकार चलाने का आरोप

आंदोलन के दौरान युवाओं का गुस्सा खुलकर सामने आया। अभ्यर्थियों ने नारे लगाते हुए कहा “अगर सरकार IAS और IPS अफसर चला रहे हैं, तो फिर 14 मंत्रियों की जरूरत क्या है?” यह बयान अब इस आंदोलन की सबसे तीखी और सियासी लाइन बन गया है। युवाओं का आरोप है कि मंत्री सिर्फ आलीशान बंगलों में बैठकर बयानबाजी कर रहे हैं और ज़मीनी हकीकत से कटे हुए हैं।

Advertisment

खून से लिखे पत्र, आखिरी गुहार

आंदोलन अब भावनात्मक और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर एक ही मांग रखी—“हमें नियुक्ति चाहिए।” युवाओं का कहना है कि वे घर से यह सोचकर निकले हैं कि या तो नौकरी लेकर लौटेंगे, या फिर उनकी अर्थी उठेगी। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए।

ठंड में अनशन, बिगड़ती सेहत

24 दिसंबर से जारी आमरण अनशन ने कई अभ्यर्थियों की सेहत पर गंभीर असर डाला है। खुले आसमान के नीचे महिलाएं और छोटे बच्चे भी धरने पर डटे हुए हैं। कई आंदोलनकारियों को हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें ड्रिप चढ़ाई गई, लेकिन इलाज के बाद वे फिर धरना स्थल लौट आए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी की जान जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और प्रशासन की होगी।

हाईकोर्ट आदेश और 2300 खाली पद

अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना कर रही है। उनका कहना है कि अदालत ने रिक्त पदों को दो महीने के भीतर भरने का निर्देश दिया था, लेकिन आज भी करीब 2300 पद खाली पड़े हैं। काउंसलिंग और पात्रता प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोजगारी झेलने को मजबूर हैं।

Advertisment

यह भी पढ़ें: रायपुर में आज से साहित्य उत्सव 2026 की भव्य शुरुआत: देशभर के 120 से अधिक साहित्यकार होंगे शामिल, तीन दिन में कुल 42 सत्र किए जाएंगे आयोजित

Advertisment
चैनल से जुड़ें