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CG News: बस्तर में SIR के मौजूदा फॉर्मेट पर उठे सवाल, हजारों आदिवासियों के नाम वोटर लिस्ट से हट सकते हैं, सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती

CG News: छत्तीसगढ़ में चल रहे SIR के दौरान बस्तर के हजारों आदिवासी वोटर्स के नाम हटाए जाने की आशंका जताई गई है। CPI के पूर्व MLA मनीष कुंजाम ने कहा कि सलवा जुडूम के दौरान विस्थापित हुए गांवों के लोगों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।

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Harsh Verma
SIR ELECTION COMMISION

SIR ELECTION COMMISION

CG News: छत्तीसगढ़ में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम पर बस्तर से एक बड़ा सवाल उठाया गया है। कोटा और कोंटा क्षेत्र से CPI के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम (Ex-MLA Manish Kunjam) ने दावा किया है कि SIR के मौजूदा फॉर्मेट के कारण हजारों आदिवासी वोटरों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी है।

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“बस्तर के हजारों आदिवासियों का वोटर अधिकार खतरे में”

बस्तरिया राज मोर्चा (Bastariya Raj Morcha) के संयोजक और आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने कहा कि SIR का मौजूदा स्वरूप बस्तर की विशेष जनजातियों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। उन्होंने कहा कि बस्तर में ऐसे हजारों परिवार हैं जिनके पास पहचान या पते का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने बताया कि सलवा जुडूम (Salwa Judum) अभियान के दौरान 644 गांव वीरान हो गए थे। हजारों घर जला दिए गए। बहुत से लोग अब भी जंगलों में रहते हैं। ऐसे इलाके में BLO (Booth Level Officer) का पहुंचना भी मुश्किल है।

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SIR का उद्देश्य और चुनौती

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है। लेकिन कुंजाम के मुताबिक, यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए परेशानी बन रही है जो मुख्यधारा के प्रशासनिक दस्तावेजों से दूर हैं।

उनके मुताबिक, यह सिर्फ चुनाव की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा “मतदान का अधिकार हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसे सुरक्षित रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।”

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

मनीष कुंजाम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस याचिका की स्क्रूटनी और वेरिफिकेशन प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही यह केस कोर्ट में सूचीबद्ध होगा।

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice Suryakant) और जस्टिस जॉय माल्या बागची (Justice Joy Malya Bagchi) की बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी। प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट से गाइडलाइंस जारी किए जाने की उम्मीद है, जिससे SIR प्रक्रिया की दिशा तय हो सकती है।

ग्राउंड से जुड़ा मुद्दा

बस्तर की जनजातियां लंबे समय से विस्थापन, सुरक्षा और दस्तावेजीकरण की कमी का सामना कर रही हैं। यहां कई गांव अब भी जंगलों के अंदर हैं। इस वजह से पहचान सत्यापन जैसी प्रक्रियाएँ चुनौतीपूर्ण हैं।

कुंजाम का कहना है कि अगर SIR बिना सुधार जारी रहा तो हजारों वोटरों के नाम सूची से हट सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ेगा।

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आगे क्या?

याचिका पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का रुख सामने आएगा। अगर कोर्ट इस पर दिशा-निर्देश जारी करता है तो बस्तर सहित पूरे प्रदेश में चल रही SIR प्रक्रिया पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

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