Gariaband Student Suicide Case: गरियाबंद में 5वीं के छात्र ने पेड़ पर फांसी लगाकर की आत्महत्या, मोबाइल की लत और मानसिक तनाव बना कारण

Gariaband Student Suicide Case: गरियाबंद के अमलीपदर थाना क्षेत्र के खरीपथरा गांव में पांचवीं कक्षा के छात्र ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्र पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव में था।

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Gariaband Student Suicide Case: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के अमलीपदर थाना क्षेत्र के खरीपथरा गांव से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। पांचवीं कक्षा में अध्ययनरत एक मासूम छात्र ने आत्महत्या कर ली।

आज सुबह बच्चे का शव गांव से लगभग 100 मीटर दूर एक पेड़ पर फंदे से लटकता हुआ मिला। यह दृश्य देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और गांव में मातम का माहौल फैल गया।

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मोबाइल की लत और मानसिक तनाव बना बड़ी वजह

परिजनों के मुताबिक, बच्चा पिछले करीब एक सप्ताह से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। वह बीते 10 दिनों में सिर्फ दो दिन ही स्कूल गया था। बाकी दिनों में वह घर में काफी समय मोबाइल पर बिताता था। परिवार का कहना है कि बीते कुछ दिनों में उसकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी। वह चुप रहने लगा था और किसी से बात करने से बचता था।

बच्चे के पिता ने बताया कि वह मोबाइल पर काफी गेम खेलता था। मोबाइल की यह लत इतनी तेजी से बढ़ी कि समय रहते वे समझ नहीं पाए कि इसका असर उसके मन पर कितना भारी पड़ रहा है।

घटना के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की जानकारी मिलते ही अमलीपदर पुलिस (Amliapadar Police) मौके पर पहुंची और तुरंत पंचनामा की कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने छात्र के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि छात्र की आत्महत्या के पीछे की वजहों का पता लगाने के लिए परिवार से लगातार पूछताछ की जा रही है। अब तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

पुलिस का स्पष्ट कहना है कि बच्चे की मानसिक स्थिति और उसके व्यवहार में आए बदलाव इस घटना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है। फिलहाल पुलिस ने धारा 174 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गांव में मातम और समाज के लिए बड़ा सवाल

खरीपथरा गांव (Kharipathra Village) में इस घटना के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में इस तरह का कदम (Student Suicide Cases) उठाना बेहद दुखद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज डिजिटल युग जहां बच्चों को सीखने के अवसर देता है, वहीं मोबाइल की बढ़ती आदतें उनके जीवन पर गलत प्रभाव भी डाल रही हैं।

यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है, क्या हम अपने बच्चों के तनाव और बदलावों को समय पर समझ पा रहे हैं? क्या हम उनकी भावनाओं पर उतना ध्यान दे रहे हैं जितना मोबाइल और इंटरनेट पर?

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