पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा पर बड़ा सवाल: चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, शासन और व्यापम को नोटिस जारी

छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा की चयन प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कथित अनियमितताओं के आरोपों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन और व्यापम को नोटिस जारी किया है।

Bilaspur High Court

CG Police Constable Recruitment Exam: छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक दायरे में गंभीर रूप ले चुका है। चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन और व्यापम को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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हाईकोर्ट में हुई अहम सुनवाई

यह मामला शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा की चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कुल 10 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद शासन और व्यापम को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों से जवाब आवश्यक है। अब इस याचिका पर अगली सुनवाई लगभग तीन सप्ताह बाद की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं के आरोप क्या हैं?

याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में भर्ती नियम 2007 का उल्लंघन किया गया है। याचिका में कहा गया है कि राज्य में कुल 5,967 पदों पर पुलिस आरक्षकों की भर्ती होनी थी, लेकिन चयन सूची में केवल 2,500 अभ्यर्थियों के नाम ही जारी किए गए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब विज्ञापन और नियमों के तहत हजारों पदों पर भर्ती की जानी थी, तो आधी से भी कम संख्या में चयन सूची जारी करना नियमों और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े करता है।

चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि चयन प्रक्रिया में न तो सभी पदों के लिए मेरिट सूची जारी की गई और न ही शेष पदों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। इससे बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए, जबकि वे सभी निर्धारित मानकों पर खरे उतरते थे।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और नियमों की अनदेखी की गई। इसी कारण उन्होंने न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है।

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