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छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को बड़ी राहत: बिलासपुर हाईकोर्ट ने VSK ऐप को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब

VSK ऐप को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता शिक्षक को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

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Harsh Verma
CG VSK App Controversy

CG VSK App Controversy: VSK ऐप (VSK App) को लेकर प्रदेश के शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ऐप की अनिवार्यता के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस एन. के. चंद्रवंशी (Justice N.K. Chandravanshi) की सिंगल बेंच ने पारित किया।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता शिक्षक को VSK ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। साथ ही, इस मुद्दे को लेकर किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी रोक रहेगी।

शिक्षक ने दी थी अनिवार्यता को चुनौती

मामले में याचिकाकर्ता शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन (Kamlesh Singh Bisen) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर VSK ऐप की अनिवार्यता को चुनौती दी है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप (Third Party App) को शिक्षकों पर जबरन लागू नहीं कर सकती।

याचिका में कहा गया है कि शिक्षकों के निजी मोबाइल फोन का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए बाध्यकारी रूप से कराना उनकी निजता (Privacy) का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि निजी संसाधनों के अनिवार्य उपयोग का आदेश संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।

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कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को गंभीरता से लिया। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। फिलहाल यह अंतरिम आदेश केवल याचिकाकर्ता शिक्षक के संदर्भ में लागू होगा। अन्य शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा या नहीं, यह अगली सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि अगली सुनवाई तक राज्य सरकार शिक्षकों को VSK ऐप लागू करने के लिए बाध्य नहीं करेगी।

निजता और अधिकारों का व्यापक सवाल

कमलेश सिंह बिसेन ने स्वयं अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक शिक्षक का नहीं, बल्कि सभी सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा है। याचिका में दो प्रमुख मुद्दे उठाए गए हैं, पहला, शिक्षकों की निजता का अधिकार और दूसरा, निजी संसाधनों के अनिवार्य उपयोग का प्रश्न। यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन का विषय बन गया है।

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