कांकेर के आमाबेड़ा विवाद के बाद मसीही समाज का फैसला: डॉ. प्रदीप क्लाडियस बोले- अब शव प्रशासन को सौंपेंगे, कब्रिस्तान की जमीन दे सरकार

कांकेर जिले के आमाबेड़ा में मसीही समाज के एक सदस्य की मौत के बाद कफन-दफन को लेकर उपजा विवाद अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। मसीही समाज के संरक्षक डॉ. प्रदीप क्लाडियस ने बड़ा बयान दिया है।

Kanker Conversion Controversy

Kanker Conversion Controversy: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में मसीही समाज के एक सदस्य की मौत के बाद कफन-दफन को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ, उसकी तपिश अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। इस घटना ने पूरे प्रदेश में सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

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मसीही समाज का बड़ा और भावुक फैसला

इस पूरे विवाद के बीच स्थानीय मसीही समाज के संरक्षक डॉ. प्रदीप क्लाडियस ने मीडिया से बातचीत में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब समाज ने यह कठिन लेकिन जरूरी फैसला लिया है कि भविष्य में किसी भी प्रियजन की मृत्यु होने पर शव को स्वयं दफनाने की कोशिश नहीं की जाएगी। इसके बजाय शव सीधे शासन-प्रशासन को सौंप दिया जाएगा, ताकि वे अपने स्तर पर कफन-दफन या अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

कब्रिस्तान की जमीन नहीं मिलने पर जताया अफसोस

डॉ. प्रदीप क्लाडियस ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि कई बार आवेदन देने, रैली निकालने और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद मसीही समाज को कब्रिस्तान के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कब्रिस्तान की उचित व्यवस्था होती, तो आमाबेड़ा जैसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। उनका कहना था कि समाज सिर्फ यह चाहता है कि मृतकों को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा सके।

“हम शांतिप्रिय लोग हैं, विवाद नहीं चाहते”

मीडिया से चर्चा के दौरान डॉ. क्लाडियस ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि मसीही समाज शांतिप्रिय है और किसी भी तरह का दंगा, फसाद या टकराव नहीं चाहता। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि कब्रिस्तान के लिए स्थायी और कानूनी रूप से मान्य जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।

धर्मांतरण के सवाल पर स्पष्ट जवाब

धर्मांतरण को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मसीही समाज के संरक्षक ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पिछले दो हजार वर्षों से होता आ रहा है और आगे भी होता रहेगा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म को चुनने या छोड़ने की आज़ादी है। लेकिन किसी को परेशान करके, डराकर या प्रताड़ित करके धर्म परिवर्तन करवाना या वापस लाना सही नहीं है।

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