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Chhattisgarh Naxalite Operation: नक्‍सलियों के खात्‍मे के लिए यूएवी हथियार सबसे अहम, 200 किमी एरिया करेगा कवर

Chhattisgarh Naxalite Operation: नक्‍सलियों के खात्‍मे के लिए यूएवी हथियार सबसे अहम, 200 किमी एरिया करेगा कवर

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Sanjeet Kumar
Chhattisgarh Naxalite Operation: नक्‍सलियों के खात्‍मे के लिए यूएवी हथियार सबसे अहम, 200 किमी एरिया करेगा कवर

   हाइलाइट्स

  • नक्‍सलियों के खात्‍मे के लिए अहम हथियार
  • यूएवी से 200KM एरिया किया जाएगा कवर
  • यूएवी से बस्‍तर में की जा सकेगी निगरानी
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Chhattisgarh Naxalite Operation: छत्‍तीसगढ़ में अब नक्‍सलियों के खात्‍मे के लिए फोर्स लगातार काम कर रही है। अब तक 100 से ज्‍यादा नक्‍सली पिछले छह माह में मारे जा चुके हैं।

इसी जंग में बस्‍तर इलाके में ड्रोन से निगरानी की जाएगी। नक्सलियों से जारी जंग में यूएवी एक अहम हथियार साबित होगा। इससे करीब 200 किलो मीटर एरिया कवर किया जा सकेगा।

बता दें कि छत्‍तीसगढ़ (Chhattisgarh Naxalite Operation) में दोनों तरह से अभियान जारी है। पहला नक्‍सली विरोधी अभियान, दूसरा लोन वर्राटू अभियान। दोनों ही अभियान के माध्‍यम से नक्‍सलवाद को खत्‍म करने का प्रयास किया जा रहा है।

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इन दोनों अभियान के माध्‍यम से बड़ी संख्‍या में नक्‍सलियों (Chhattisgarh Naxalite Operation) की घर वापसी भी कराई गई है। छत्‍तीसगढ़ के नक्‍सल प्रभावित इलाकों में लोन वर्राटू अभियान के तहत नक्‍सलियों का पुनर्वास कराया जा रहा है। उन्‍हे नए जीवन के लिए आर्थिक मदद की जा रही है।

   8 से 10 घंटे उड़ सकते हैं विमान

Chhattisgarh Naxalite Operation-UAV Dron in Bastar

बस्तर में नक्सलियों का सफाया जारी है। इंटेलीजेंस बेस्ड ऑपरेशंस (Chhattisgarh Naxalite Operation) से उन्हें ठिकाने लगाया जा रहा है। ऐसे में यूएवी का यहां होना काफी अहम हो जाता है।

इंटेलीजेंस एजेंसियां इनके जरिए मिलने वाली सूचनाओं को शेयर करती हैं। उसके बाद ऑपरेशन प्लान किया जाता है। एक बार ईंधन भरने के बाद रिमोट से ऑपरेट होने वाले ये विमान 8 से 10 घंटे लगातार उड़ सकते हैं। इनसे 1 हजार से लेकर 1500 फीट तक की ऊंचाई से जंगलों के अंदर की एक्टिविटिज को आसानी से कैप्चर कर सकते हैं।

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   मिल रहा तकनीकी सपोर्ट

बस्‍तर आईजी सुंदरराज पी ने जानकारी दी कि बड़े ऑपरेशन (Chhattisgarh Naxalite Operation) में मिल रही कामयाबी इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि इनमें नक्सली तो मारे जा रहे हैं, लेकिन, जवानों को खरोंच तक नहीं आ रही है। गोरिल्ला स्टाइल में लड़ने वाले नक्सली, फोर्स को मिल रहे तकनीकी सपोर्ट की वजह से मात खा रहे हैं।

   नेत्रा-2 ड्रोन का इस्‍तेमाल कर रहे

बस्‍तर आईजी सुंदरराज पी ने जानकारी दी कि फोर्स के जवानों को मदद मिल सके, इसलिए हर तरह के लीगल और उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है।

फिलहाल इजराइल से मिले हैरॉन और बारिश के दिनों में जंगल के अंदरुनी इलाकों में नेत्रा-2 ड्रोन को भी उपयोग में लाया जा रहा है। एनटीआरओ के जरिए पूरी जानकारी जुटाई जाती है।

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इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही प्लानिंग तैयार की जा रही है। इस उच्च स्तर की तकनीक के चलते सीधे टारगेट पॉइंट को कवर करने में मदद मिल रही है।

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   बैकफुट पर नक्‍सली

चूंकि नक्सल समस्या से निपटने को लेकर केंद्र की सरकार कटिबद्ध है, इसलिए अब सीधे वहीं से निगरानी हो रही है और रिजल्ट ओरिएंटेड ऑपरेशंस (Chhattisgarh Naxalite Operation) पर जोर दिया जा रहा है।

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ऐसे में उपलब्ध तकनीक और संसाधनों के प्रयोग की वजह से ही नक्सली बैकफुट पर हैं। बड़े ऑपरेशन में मिल रही कामयाबी इसलिए बड़ी नहीं है कि काफी संख्या में नक्सली मारे जा रहे हैं, बल्कि इन ऑपरेशंस का महत्व इसलिए बढ़ जाता है।

क्योंकि ट्रूप में शामिल सैकड़ों जवानों में से किसी को खरोंच तक नहीं आ रही। गुरिल्ला वारफेयर में दक्ष नक्सली भी फोर्स को मिल रहे तकनीकी सपोर्ट की वजह से मात खा रहे हैं।

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