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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अंदरूनी कलह: विधायक दिलीप लहरिया पर भितरघात के आरोप, चुनावी हार के बाद पार्टी में मचा घमासान

Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अंदरूनी कलह, विधायक दिलीप लहरिया पर भितरघात के आरोप, चुनावी हार के बाद पार्टी में मचा घमासान

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Harsh Verma
Chhattisgarh Congress

Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ कांग्रेस विधानसभा चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव में हार के बाद लगातार विवादों में घिरी हुई है। पार्टी में अनुशासनहीनता को लेकर कई शिकायतें पीसीसी दफ्तर पहुंच रही हैं।

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अब कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया और उनके बेटे अरविंद लहरिया के खिलाफ पार्टी से निष्कासन की मांग उठाई गई है।

विधायक और उनके बेटे पर बागी प्रत्याशी का समर्थन करने का आरोप

मस्तूरी से कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया और उनके बेटे अरविंद लहरिया पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा है। कांग्रेस के पूर्व सचिव रवि जायसवाल ने बिलासपुर (ग्रामीण) जिला कांग्रेस कमेटी को लिखित शिकायत भेजी है।

इसमें कहा गया है कि पंचायत चुनाव में दोनों ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अरविंद लहरिया ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बागी उम्मीदवार किरण संतोष यादव का समर्थन करने के लिए कहा, जिससे भाजपा प्रत्याशी राधा खिलावन पटेल को जीतने का फायदा मिला।

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शिकायत के साथ ऑडियो प्रमाण भी प्रस्तुत किया गया

शिकायत के साथ एक ऑडियो भी सौंपा गया है, जिसमें एक व्यक्ति यह कहता सुनाई देता है कि अरविंद लहरिया ने फोन पर किरण संतोष यादव को जिताने के लिए समर्थन मांगा।

इसके अलावा, आरोप लगाया गया कि विधायक दिलीप लहरिया ने अपने क्षेत्र का दौरा नहीं किया, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन नहीं मिला और हार का सामना करना पड़ा।

पहले भी कांग्रेस में लगे हैं भितरघात के आरोप

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के विधायकों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगे हैं। इससे पहले, बिलासपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव को पार्टी से निष्कासित करने की सिफारिश की थी।

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उन्होंने आरोप लगाया था कि एक बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की उपस्थिति में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया था।

क्या बागियों के समर्थकों पर भी होगी कार्रवाई?

हाल ही में कांग्रेस ने बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि बागियों को समर्थन देने वालों पर भी पार्टी सख्त कदम उठाएगी या नहीं। आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

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