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Chandipura Virus: गुजरात में चांदीपुरा वायरस ने ली 27 जान, इन 5 तरीकों से करें बच्चों का बचाव; हेल्पलाइन नंबर जारी

Chandipura Virus: गुजरात में चांदीपुरा वायरस फैल रहा है, लोग अपने बच्चों को इस वायरस से बचाने के लिए अलग-अलग तरीके आजमा रहे हैं।

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aman sharma
Chandipura Virus: गुजरात में चांदीपुरा वायरस ने ली 27 जान, इन 5 तरीकों से करें बच्चों का बचाव; हेल्पलाइन नंबर जारी

Chandipura Virus: गुजरात में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) अपना प्रकोप दिखा रहा है। यहां पर संक्रमित मरीजों की संख्या में दिन ब दिन वृद्धि होती जा रही है। रविवार को सूरत में पहला संदिग्ध मामला सामने आया था।

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यहां पर एक स्लम एरिया में रहने वाली महज 11 साल की बच्ची को तेज बुखार और उल्टियां होने के बाद आईसीयू में भर्ती करवाया गया। राजकोट में भी एक और संदिग्द मामला सामने आया है। बता दें कि दोनों बच्चों के सैंपल जांच के लिए पुणे प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।

साथ ही गुजरात में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) के मामलों की कुछ संख्या बढ़कर 73 पहुंच गई है। वहीं, अब तक यह वायरस 27 लोगों की जान ले चुका है। जबकि 41 मरीजों का इलाज हॉस्पिटल में चल रहा है। बता दें कि हाल ही में बडोदरा के सयाजी अस्पाताल में भर्ती एक चार साल के बच्चे की मौत चांदीपुरा वायरस संक्रमण से हो गई थी।

बढ़ता चांदीपुरा वायरस, सरकार ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

शुरुआत में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) का प्रकोप सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सिमित नजर आ रहा था, लेकिन धीरे-धीरे यह वायरस अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और सूरते जैसे बड़े शहरों को भी अपनी चपेट में ले रहा है।

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चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 104 को शुरू किया है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से चांदीपुरा वायरस की चपेट में आया व्यक्ति या उसके परिजन सभी प्रकार के मामलों और उसके इलाज की जानकारी आसानी से उपलब्ध कर सकते हैं।

350 के मुकाबले केवल 30 बच्चों के डॉक्टर्स

चांदीपुरा वायरस गुजरात के गांवों और शहरों में धीरे-धीर फैलता जा रहा है। यह वायरस (Chandipura Virus) खासतौर पर बच्चों को पर अपना शिकार बना रहा है। जबकि गुजरात में बाल रोग विशेषज्ञ की स्थिति काफी डराने वाली है। दरअसल, गुजरात में पीडियाट्रिक डॉक्टरों की संख्या काफी कम है।

ग्रामीण स्वास्थ की स्थिति पर भारत सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 22 तक गुजरात में 344 बच्चों के डॉक्टर्स की जरूरत थी, इसके लिए 76 सीटें स्वीकृत की गई थीं। मगर 76 पदों में सिर्फ 30 पदों पर ही बाल रोग विशेषज्ञ की भर्ती की गई, जबकि 46 पद अभी भी रिक्त हैं।

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हैरानी की बात यहै है कि प्रदेश में 344 पीडियाट्रिक डॉक्टरों होने चाहिए थे, लेकिन जरूरत की तुलना में मौजूदा डॉक्टर्स की संख्या घटा दें तो सिर्फ 314 डॉक्टर हैं। एक रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि सामान्य डॉक्टर्स और विशेषज्ञ डॉक्टर्स के साथ-साथ कर्मचारियों की भी भारी कमी है।

जामनगर पहुंचा चांदीपुरा वायरस

चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) का प्रकोप का जामनगर तक पहुंच गया है। अभी तक यहां पर पांच संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं। इस दौरान एक बच्चे की मौत हो गई है।

जबकि पांच में से दो बच्चों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है और मृतक बच्चे समेत तीन बच्चों की रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। बता दें कि जिन दो बच्चों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है उनकी तबीयत अभी स्थिर है, जबकि अन्य दो मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है।

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ऐसे करता है वायरस संक्रमित

विशेषज्ञों के अनुसार चांदीपुरा वायरस खासतौर पर बच्चों को अपना शिकार बनाता है। यह वायरस 9 महीने से लेकर 14 साल के बच्चों को प्रभावित करता है। संक्रमण तब बच्चों के शरीर में फैसला है, जब मच्छर या मक्खी (Chandipura Virus) के काटने पर उनका लार रक्त तक पहुंच जाता है। इससे बच्चों को तेज बुखार और सिरदर्द जैसी बिमारियां होती हैं। बता दें कि गुजरात में हर साल इस वायरस के मामले सामने आते हैं।

चांदीपुरा वायरस क्या है

इस वायरस का पहला मामला 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुर (Chandipura Virus) में सामने आया था। इस वायरस से महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाके प्रभावित हुए थे। वायरस से रोगी मस्तिष्क ज्वर (एन्सेफेलाइटिस) का शिकार हो जाता है। वायरस मच्छरों और मक्खियों के काटने से फैलता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार इस वायरस (Chandipura Virus) का पहला मामला साल 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुर गांव में सामने आया था। इस वायरस ने महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में अपना प्रभाव छोड़ा था। वायरस से रोगी के मस्तिष्क ज्वर (एन्सेफेलाइटिस) नामक बिमारी का शिकार हो जाता है। वायरस मच्छरों और मक्खियों के काटने से फैलता है।

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ऐसे करें बच्चों का बचाव

चांदीपुरा वायरस से अपने बच्चों को बचाने के लिए ये कार्य करें-

  1. बच्चों को घर के बाहर कम कपड़ों में न खेलने दें।
  2. जहां तक संभव हो बच्चों को मच्छरदानियों में ही सुलाएं।
  3. सैंड फ्लाई मक्खियों को घर में घुसने से रोकने के उपाय करें।
  4. मच्छरों को और मक्खियों को घर में घुसने से रोकने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करते रहे और घर में साफ सफाई बनाएं रखें
  5. साथ ही चांदीपुरा लक्षण का संकेत मिलते ही तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में ले जाएं।

ये हैं चांदीपुरा वायरस के 4 बड़े लक्षण

  1. चांदीपुरा वायरस की चपेट में आने के बाद बच्चों को तेज बुखार आने लगता है।
  2. वायरस संक्रमित होने के बाद बच्चों को दस्त और उल्टियां होने लगती है।
  3. चांदीपुरा वायरस की चपेट में आने के बाद मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है।
  4. चांदीपुरा वायरस की चपेट में आने के बाद कमजोरी और बेहोशी होने लगती है।

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