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छत्तीसगढ़ शिक्षक दिवस: शिक्षक खुद ही सम्मान-पत्र और स्मृति चिन्ह लेकर अतिथियों के समक्ष पहुंचे, अब विवादों में आयोजन

CG Teacher Samman Controversy 2025: छत्तीसगढ़ में शिक्षक सम्मान समारोह इस बार विवादों में आ गया। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को पहले ही सम्मान सामग्री थमा दी और मंच पर केवल फोटोशूट कराया। इतना ही नहीं, ड्रेस कोड को भी अनिवार्य किया गया जिससे शिक्षक संघ ने नाराजगी जताई।

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BP Shrivastava
CG Teacher Samman Controversy 2025

CG Teacher Samman Controversy 2025

हाइलाइट्स

  • राज्यपाल भवन में शिक्षक सम्मान समारोह 
  • शिक्षकों को सम्मान से पहले ही थमा दिए स्मृति चिन्ह
  • ड्रेस कोड से लेकर कई प्रतिबंधों से शिक्षकों में नाराजगी
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CG Teacher Samman Controversy 2025: छत्तीसगढ़ में शिक्षक सम्मान समारोह शिक्षा विभाग की कुछ अजीब व्यवस्थाओं के चलते विवाद में आ गया है। शिक्षकों को सम्मान के रूप में दी जाने वाली सभी सामग्री उन्हें पहले ही थमा दी गई। इसके बाद सभी शिक्षक मंच पर पहुंचे। इसके बाद गवर्नर- मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों के साथ फोटोशूट करा दिया गया। इतना ही नहीं सभी सम्मानित शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड भी अनिवार्य कर दिया गया था। अब इसे लेकर शिक्षक संघ ने नाराजगी जताई है।

इस वर्ष भी शिक्षक दिवस के दिन राजभवन में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में 64 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। लेकिन शिक्षा विभाग ने इस बार कुछ ऐसा कर दिया कि शिक्षकों की गरिमामय सम्मान समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

ड्रेस कोड किया अनिवार्य

आयोजन में पहली बार सम्मानित शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने ड्रेस कोड को अनिवार्य कर दिया। सभी पुरुष शिक्षकों को विभाग की ओर से कह दिया गया कि वे साहब लोगों की तरह से शूट-बूट में आएं और ड्रेस कलर एक जैसा रहे। इसी तरह से महिला शिक्षकों के लिए एक ही रंग की बार्डर वाली साड़ी अनिवार्य की गई।

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शिक्षक खुद ही सम्मान-पत्र लेकर पहुंचे

हद तो तब और हो गई जब शिक्षक सम्मान समारोह शुरु होने से पहले अपनी जगह पर बैठे शिक्षकों के हाथों में सम्मान का सारा समान अधिकारियों ने थमा दिया। इसी दौरान शिक्षक खुद ही सम्मान-पत्र और स्मृति चिन्ह लेकर राज्यपाल के पास पहुंचे। इतना ही नहीं शिक्षकों के गले में शॉल भी पहले ही डाल दिया गया था।

इसके बाद छत्तीसगढ़ के 4 विभूतियों की स्मृति से सम्मानित शिक्षकों को एक-एक कर राज्यपाल के पास पहुंचा दिया गया और अन्य सभी 60 शिक्षकों को समूहों में सीधे तस्वीरों के लिए राज्यपाल के सामने खड़ा कर दिया गया।

शिक्षकों पर यह प्रतिबंध भी लगाए

समारोह में शिक्षकों के लिए राजभवन में कई तरह की पाबंदियां भी लगा दी गई थी। जैसे- कोट पहने, लेकिन टाई नहीं। कुछ शिक्षक जो टाई पहनकर पहुंचे थे, उनकी टाई उतरवा दी गई। बताते हैं शिक्षकों को सम्मानपूर्वक न तो बुलाया और न ही ठहराया गया। एक हॉस्टल में गुरुओं के रुकने की व्यवस्था की गई। मोबाइल पूरी तरह बंद रखना था। इसके अलावा फोटो खींचने पर पूरी तरह प्रतिबंध था।

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शिक्षक संघ ने जताई नाराजगी

गवर्नर हाउस में आयोजित इस तरह के सम्मान समारोह को लेकर सम्मानित शिक्षकों और संघ में भारी नाराजगी है। शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेन्द्र दुबे का कहना है कि राजभवन में इस तरह का सम्मान समारोह पहले कभी नहीं हुआ। शिक्षकों पर ड्रेस कोड की अनिवार्यता डालना एक तरह वित्तीय बोझ डालना है। शिक्षकों के लिए शालीन पहनावा होना चाहिए, लेकिन शूट-बूट की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। यही नहीं शिक्षकों के लिए सम्मान उनकी जीवनभर की असल पूंजी होती है।

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राज्यपाल के हाथों सम्मानित होने का गौरव एक यादगार पल होता है, लेकिन इस पल को समूहों में बांट देना सही नहीं है। पहले कभी इस तरह की कोई परपंरा नहीं रही है। राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान हो या पद्म सम्मान समारोह यहां भी ड्रेस कोड की अनिवार्यता नहीं रहती और ना ही समूहों में सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री को इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। ताकि आने वाले वर्ष में इस तरह का अव्यवहारिक निर्णय या कृत्य ना किया जाए।

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