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CG High Court News: हाईकोर्ट ने रद्द की CBI कोर्ट की सजा, रिश्वतखोरी मामले में SECL कर्मियों को मिली बड़ी राहत

CG High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने PF रिश्वतखोरी मामले में CBI कोर्ट द्वारा दी गई डेढ़ साल की सजा रद्द कर दी। सबूतों पर संदेह के आधार पर कर्मियों को राहत मिली।

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Shashank Kumar
CG High Court

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हाइलाइट्स

  • हाईकोर्ट ने रद्द की CBI कोर्ट की सजा

  • PF रिश्वतखोरी मामले में SECL कर्मियों को राहत

  • सुप्रीम कोर्ट में SLP पर उपस्थिति अनिवार्य

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CG High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने (High Court News) एक बड़ा फैसला सुनाते हुए CBI Special Court द्वारा दी गई डेढ़ साल की सजा को रद्द कर दिया है। मामला PF Withdrawal Bribery Case से जुड़ा था। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच जस्टिस रजनी दुबे ने याचिकाकर्ता SECएल कर्मियों को सशर्त जमानत (Conditional Bail) भी दी है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट में Special Leave Petition (SLP) दायर होती है तो याचिकाकर्ताओं को उपस्थित होना अनिवार्य होगा।

PF राशि निकालने में मांगी गई थी रिश्वत

प्रकरण के अनुसार, शिकायतकर्ता कर्मचारी ने अपनी CMPF राशि निकालने (PF Withdrawal Process) के लिए कार्मिक प्रबंधक, SECL सुराकछार कोलियरी में आवेदन प्रस्तुत किया था। आरोप है कि उनके आवेदन पर कार्रवाई करने के लिए 10,000 रुपए की रिश्वत (Bribery Case in SECL) मांगी गई। शिकायतकर्ता ने असमर्थता जताते हुए केवल 2,000 रुपए देने की सहमति दी।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने केंद्रीय ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) में शिकायत दर्ज कराई। CBI ने 8 नवंबर 2004 को ट्रैप कार्रवाई कर संबंधित कर्मियों को पकड़ा और उन पर IPC सेक्शन 120B, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)(D), 13(2) के तहत मामला दर्ज किया।

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CBI कोर्ट ने सुनाई थी डेढ़ साल की सजा

स्पेशल कोर्ट (CBI Special Court Judgment) ने आरोप तय करने के बाद आरोपियों को डेढ़ साल की सजा और 3,000 रुपए जुर्माने से दंडित किया था। साथ ही जुर्माना न भरने पर 6-6 महीने की अतिरिक्त सजा का आदेश दिया था। हालांकि, इस फैसले को आरोपियों ने हाईकोर्ट (CG High Court) में चुनौती दी।

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हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की सजा?

हाईकोर्ट में अधिवक्ता संदीप दुबे ने दलील दी कि (Legal Argument in High Court) शिकायतकर्ता के बयान विरोधाभासी हैं। शिकायतकर्ता ने कहा कि आरोपी नित्यानंद ने रिश्वत के पैसे रख लिए, जबकि रिश्वत की रकम स्टोर रूम से जब्त हुई थी (Bribery Evidence Issue), न कि आरोपी के पास से। इससे पूरा मामला संदेहास्पद हो गया और हाईकोर्ट ने सजा रद्द करते हुए कर्मियों को राहत दी।

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