हाइलाइट्स
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करंट से हुई ठेका श्रमिक की मौत
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रेलवे पर लापरवाही का आरोप
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हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, जीएम को नोटिस
Bilaspur Railway Yard: बिलासपुर के रेलवे कोचिंग यार्ड में ट्रेन की सफाई के दौरान ठेका मजदूर की करंट से मौत मामले में हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने रेलवे के रवैए पर नाराजगी जताई है।
साथ ही रेलवे के जीएम को तीन दिन में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
रेलवे छिपाता रहा जानकारी
दूसरी तरफ रेलवे के अधिकारी ठेका श्रमिक की मौत की जानकारी हाईकोर्ट से छिपाते रहे। अब नाराज परिजन डीआरएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।
रेलवे की अनाकानी, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
रेलवे में OHE तार की करंट से झुलसे ठेका श्रमिक के इलाज को लेकर पिछले तीन दिन से बवाल मचा रहा। आखिरकार, गुरुवार, 28 अगस्त को ठेका श्रमिक की अस्पताल में मौत हो गई।
दर्दनाक हादसे के बावजूद रेलवे प्रबंधन ठेका श्रमिक के इलाज और मुआवजे को लेकर आनाकानी करता रहा है। जिसको लेकर परिजनों में आक्रोश है। इधर, हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है।
जानें कैसे हुई घटना
जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन रेलवे में ठेका श्रमिक था। वो कोचिंग डिपो में इलेक्ट्रिशियन का काम कर रहा था। 23 अगस्त को वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के एक्स्ट्रा कोच का एसी सुधारते समय प्रताप बर्मन OHE तार की करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
परिजन का आरोप है कि, बिजली सप्लाई बंद किए बगैर ही प्रताप को कोच के ऊपर चढ़ा दिया गया था। सुरक्षा से खिलवाड़, अफसर और ठेकेदार की लापरवाही के चलते ये हादसा हुआ।
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हाईकोर्ट ने रेलवे अफसरों को क्या दिए निर्देश
अब चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान एस-ईसीआर के जीएम और डीआरएम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जोड़ने के निर्देश दिए। महज 15-20 मिनट में जुड़े जीएम ने रेलवे के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई। वहीं, इस दौरान रेलवे के अधिकारियों ने ठेका श्रमिक की मौत और अपोलो हॉस्पिटल में परिजनों और ग्रामीणों के हंगामे की जानकारी हाईकोर्ट से छिपाए रखा। उन्होंने कोर्ट को यह नहीं बताया कि कर्मचारी की मौत हो चुकी है। डिवीजन बेंच ने रेलवे को तीन दिन का समय दिया है। इस दौरान जीएम को एक शपथपत्र दाखिल करना होगा, जिसमें घटना की पूरी जानकारी, इलाज और मुआवजे का विवरण और ठेकेदार पर की गई कार्रवाई का ब्योरा शामिल होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
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