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बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: क्रमोन्नति वेतनमान मामले में सोना साहू की याचिका खारिज, कल होगी 289 मामलों की सुनवाई

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने क्रमोन्नति वेतनमान मामले में शिक्षिका सोना साहू की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने रामनिवास साहू को भी राहत नहीं दी।

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Shashank Kumar
Bilaspur High Court

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हाइलाइट्स 

  • सोना साहू की याचिका खारिज

  • रामनिवास साहू को भी राहत नही

  • 289 मामलों की सुनवाई 3 नवंबर

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Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) में चल रहे क्रमोन्नति वेतनमान विवाद (Kramonnati Vetanman Case) में एक अहम मोड़ आया है। शिक्षिका सोना साहू की दायर याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट का यह फैसला उन सैकड़ों शिक्षकों के लिए बड़ा झटका है, जो पिछले कई महीनों से क्रमोन्नति और पदोन्नति वेतनमान (Promotion Pay Scale) को लेकर न्यायालय की शरण में हैं।

रामनिवास साहू को भी नहीं मिली राहत

इस मामले में खास बात यह रही कि सोना साहू की याचिका में निर्णायक भूमिका निभाने वाले रामनिवास साहू को भी कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने उनके दावे को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रस्तुत दस्तावेज और दलीलें उनके दावे को सिद्ध करने में नाकाम रहीं।

कोर्ट ने उठाए अहम सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अन्य याचिकाकर्ताओं से यह भी पूछा कि उनका मामला किस प्रकार सोना साहू की याचिका से भिन्न है या मेल खाता है। साथ ही, कोर्ट ने यह स्पष्ट करने को कहा कि नियुक्ति के समय क्या बीएड (B.Ed) अनिवार्य था या नहीं। यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि कई शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी जब बीएड की अनिवार्यता पर स्पष्ट नियम नहीं थे।

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289 मामलों पर भी होगी सुनवाई

इस क्रमोन्नति विवाद से जुड़े करीब 289 मामलों की सुनवाई भी कल होने वाली है। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 3 नवंबर तय कर दी है। माना जा रहा है कि इस दिन कोर्ट का रुख और भी स्पष्ट होगा कि शिक्षकों के दावे कितने मजबूत हैं और उन्हें राहत मिलेगी या नहीं।

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शिक्षक समुदाय में चिंता और उम्मीद दोनों

इस फैसले ने शिक्षक समुदाय (Teachers Community in Chhattisgarh) में मिश्रित भावनाएं पैदा कर दी हैं। जहां एक ओर सोना साहू और रामनिवास साहू जैसे मामलों के खारिज होने से निराशा छाई है, वहीं दूसरी ओर बाकी शिक्षकों को उम्मीद है कि आने वाली सुनवाई में उनके पक्ष में कुछ राहत मिल सकती है।

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क्रमोन्नति वेतनमान विवाद अब केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं रहा, बल्कि हजारों शिक्षकों के भविष्य और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक सेवा दी है और अब उन्हें न्याय चाहिए। हाईकोर्ट के आगामी आदेश (High Court Order) पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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