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Bilaspur High Court: हाईकोर्ट ने दुष्‍कर्म के मामले में टीचर को किया बरी, पीड़िता की कहानी को किया खारिज

Bilaspur High Court: हाईकोर्ट ने दुष्‍कर्म के मामले में टीचर को किया बरी, पीड़िता की कहानी को किया खारिज, सहमति से संबंध बनाने की बात आई

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Sanjeet Kumar
Bilaspur High Court

Bilaspur High Court

Bilaspur High Court: छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक कथित दुष्‍कर्म के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अध्यापिका की कहानी को हाई कोर्ट ने नहीं माना है। इसी के चलते दुष्कर्म के आरोपी शिक्षक को दोष मुक्त करने के मामले में अपील दायर की गई थी। इस अपील को खारिज कर दिया गया है।

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हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) ने इस दुष्‍कर्म के मामले में पाया कि शिक्षिका जो कि अपीलकर्ता हैं, ने संबंध बनाने के लिए सहमति दी थी। इस मामले में पहले महिला शिक्षक ने एक टीचर पर दुष्‍कर्म का आरोप लगाया था। इस मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने शिक्षक को बरी कर दिया था।

घर में आकर किया था दुष्‍कर्म

जानकारी के अनुसार बलौदाबाजार (Bilaspur High Court) जिले के प्राइमरी स्‍कूल में पदस्थ शिक्षिका ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया था कि वह अपने बच्चे के साथ किराए से रहती है। जुलाई 2018 में एक दिन दोपहर के समय पास के गांव के स्‍कूल में पदस्‍थ शिक्षक उसके घर आया।

उस शिक्षक ने महिला टीचर के बच्‍चे को चॉकलेट खाने के लिए 100 रुपए दिया और बाहर भेज दिया। जब बच्‍चा घर से बाहर दुकान चला गया तो आरोपी शिक्षक ने शादी करने की बात कहकर शिक्षिका के साथ दुष्‍कर्म किया। इतना ही नहीं शादी की बात न मानने पर बच्चे को जान से मारने की धमकी दी और दुष्कर्म किया।

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अपराध नहीं हो पाया सिद्ध

महिला शिक्षिका (Bilaspur High Court) ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने महिला की रिपोर्ट पर जुर्म दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया। इस मामले में सुनवाई के उपरांत कोर्ट में अपराध सिद्ध नहीं हो पाया, इस पर आरोपी को कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया। इसके विरोध में पीड़िता ने हाई कोर्ट में अपील दायर की गई।

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इसलिए खारिज कर दी याचिका

इस पूरे मामले की सुनवाई हुई। गवाहों के बयान (Bilaspur High Court) के बाद सामने आया कि पीड़िता जिस जगह किराए से रहती है। वहां अन्‍य किरायदार और भी हैं। महिला के द्वारा उसके साथ जो घटना हुई थी, उस बारे में किसी को जानकारी दी नहीं दी।

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आरोपी की ओर से जो गवाह पेश किए गए, उन्‍होंने कहा कि महिला को समाज की प्रथा के अनुसार, चूड़ी पहनाकर वह अपने गांव ले गया था। जहां दोनों साथ में तीन से चार दिनों तक रुके भी थे। इन सब सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पीड़िता की सहमति से संबंध बनने की बात कही। इसी के साथ शिक्षिका की अपील को खारिज कर दिया। इसी के साथ ही निचली अदालत के आदेश को यथावत रखा।

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