हाइलाइट्स
- सीतामढ़ी में 882 करोड़ की लागत से बनेगा जानकी मंदिर
- अमित शाह करेंगे 8 अगस्त को मंदिर निर्माण का भूमि पूजन
- 67 एकड़ में बनेगा आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र
Janaki Mandir Sitamarhi: अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद अब माता सीता की जन्मभूमि सीतामढ़ी के पुनौराधाम में भव्य जानकी मंदिर परिसर का निर्माण शुरू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक परियोजना की शिलान्यास (भूमि पूजन) 8 अगस्त 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य मंत्री भी मौजूद रहेंगे।
67 एकड़ में बनेगा भव्य मंदिर परिसर
जानकी मंदिर को सीतामढ़ी के पुनौराधाम में 67 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। इस मंदिर को आधुनिक तीर्थ स्थल और धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस पूरे प्रोजेक्ट पर 882.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें से 137.34 करोड़ रुपये सिर्फ मंदिर के निर्माण पर खर्च होंगे। इस योजना की देखरेख बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम कर रहा है।
मंदिर परिसर में क्या-क्या होगा खास?
इस मंदिर परिसर में सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि कई आधुनिक और धार्मिक सुविधाएं भी बनाई जाएंगी:
151 फीट ऊंचा मुख्य जानकी मंदिर
यज्ञ मंडप (जहाँ धार्मिक हवन होंगे)
संग्रहालय (सीता माता से जुड़ी जानकारी के लिए)
ऑडिटोरियम (कार्यक्रमों के लिए)
कैफेटेरिया और धर्मशाला
सीता वाटिका और लव-कुश वाटिका
बच्चों के लिए खेल क्षेत्र
बड़ी पार्किंग
परिक्रमा पथ और मार्ग प्रदर्शनी
पहले से मौजूद मां जानकी कुंड का सौंदर्यीकरण
सीता जी का नेपाल से रिश्ता
भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक धरोहरों में माता सीता पूजनीय हैं। रामायण की नायिका, भगवान राम की अर्धांगिनी और आदर्श नारीत्व की प्रतीक माता सीता का जन्म स्थान जनकपुर, आज के नेपाल में है। ये जगह श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां हर साल हजारों लोग दर्शन करने आते हैं।
जनकपुरधाम
जनकपुर को प्राचीन काल में विदेह साम्राज्य की राजधानी माना जाता था, जहां के राजा जनक थे। पुराणों और रामायण के अनुसार, राजा जनक को यज्ञ भूमि से कन्या की प्राप्ति हुई थी। माता सीता को जानकी और मैथिली भी कहते हैं।
जानकी मंदिर
जनकपुर का जनक मंदिर (जानकी मंदिर) आज भी सीता जी की स्मृति को सहेजे हुए है। यह भव्य मंदिर 19वीं शताब्दी में बना और नेपाल के सबसे भव्य धार्मिक स्थलों में शामिल है। हर साल विवाह पंचमी के मौके पर भारत और नेपाल से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं और राम-सीता विवाह की प्रतीकात्मक झांकी में शामिल होते हैं।
दो देशों की सांस्कृतिक नींव
सीता जी का नेपाल से संबंध सिर्फ धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत-नेपाल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की नींव भी है। नेपाल की मिथिला संस्कृति और भारत की अवध परंपरा को जोड़ने वाली यह पौराणिक कड़ी, दोनों देशों की साझा विरासत का प्रतीक है। भारत-नेपाल के बीच सांस्कृतिक उत्सव, रामायण सर्किट यात्रा और धार्मिक पर्यटन परियोजनाएं इसी कड़ी को और मजबूत करने का प्रयास हैं।
42 हफ्ते में पूरा होगा निर्माण
पर्यटन विभाग का कहना है कि पूरा निर्माण कार्य सिर्फ 42 हफ्ते (करीब 11 महीने) में पूरा कर लिया जाएगा। इसका मतलब है कि 2026 के सावन महीने में मंदिर परिसर का उद्घाटन हो सकता है। अधिकांश भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और टेंडर की प्रक्रिया भी लगभग खत्म है।
पुनौराधाम को मिलेगा नया धार्मिक पहचान
पुनौराधाम, जिसे माता सीता का जन्मस्थान माना जाता है, पहले से ही एक आस्था का केंद्र है। अब इस योजना के बाद यह जगह एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल बन जाएगी। इस परियोजना से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार, व्यापार और सामाजिक-आर्थिक विकास का भी लाभ मिलेगा।