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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: MPPSC छह हफ़्तों के अंदर करे नियुक्ति प्रक्रिया पूरी, एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर होगी भर्ती

MP Assoc. Professor Bharti: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, MPPSC छह हफ़्तों के अंदर कराएगा नियुक्ति, एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर होगी भर्ती

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Manya Jain
MP Assoc. Professor Bharti

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MP Assoc. Professor Bharti: मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग ने साल 2021 जुलाई में राज्य में गवर्मेंट और सेमी-गवर्मेंट  इंस्टीट्यूशन में कई पदों पर नियुक्तियों के लिए सिलेक्शन प्रोसेस शुरू की गई थी। लेकिन कई पदों के परिणामों को परीक्षा आयोजित करने के बाद रोक दिया गया था।

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जिसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court on MPPSC) ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को निर्देश दिए हैं. इस निर्देश के अनुसार लोक सेवा आयोग को छह हफ़्तों के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की बात कही गई है।

बता दें न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह (MP Assoc. Professor Bharti) की बेंच ने आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि एक बार चयन प्रक्रिया शुरू हो जाती है तो तो उसे बिना उचित कारण के विज्ञापित पदों को रद्द नहीं किया जा सकता है। इसलिए आयोग को मूल विज्ञापित पदों के अनुसार चयन प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों रुकी थी भर्ती प्रक्रिया 

साल 2021 में गवर्मेंट और सेमी-गवर्मेंट कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। पीएससी ने विज्ञापन जारी किया, परीक्षा आयोजित की, लेकिन जब इंटरव्यू का समय आया तो (MP Assoc. Professor Bharti) नियुक्ति प्रक्रिया को रोक दिया गया। जिसका कारण बताया गया कि गलती से विज्ञापन में पदों को रिक्त दिखाया गया था।

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याचिकाकर्ता अमीन खान ने बताया कि पीएससी ने हाई कोर्ट में गलत जानकारी दी थी। कोर्ट को बताया गया कि पद खाली हैं और सरकार की वेबसाइट पर भी रिक्त दिख रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में पीएससी ने स्वीकार किया कि गलती (Supreme Court on MPPSC) से हाई कोर्ट में गलत जानकारी दी गई थी और गलत तरीके से पद हटाए गए थे। पीएससी ने सुप्रीम कोर्ट में भी माना कि उसने हाई कोर्ट में गलत जानकारी प्रस्तुत की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई  कड़ी फटकार 

इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फरवरी 2023 के फैसले को निरस्त कर दिया। उस फैसले में यह कहा गया था कि उम्मीदवारों के पास यह अधिकार नहीं होता कि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि विज्ञापन के तहत खाली पदों को भरना अनिवार्य है।

इससे पहले भी, सुप्रीम कोर्ट ने मप्र लोक सेवा आयोग को अधूरी जानकारी प्रस्तुत करने पर कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद आयोग ने अपनी गलती मान ली थी।

 

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