धर्म को मजहब के संदर्भ में समझना बड़ी गलती :तोमर -

धर्म को मजहब के संदर्भ में समझना बड़ी गलती :तोमर

भोपाल। धर्म को मजहब के संदर्भ में नहीं समझा जा सकता। आज हो क्या रहा है कि आप इस्लाम के संदर्भ में सनातन को समझने लगे हो। यह बहुत बड़ी गलती हमसे हो रही है। धर्म को कभी किसी मजहब के रेफरेंस में नहीं समझा जा सकता। धर्म का ज्ञान जिन लोगों को है, वे एक बात समझते हैं कि धर्म का उल्लेख सनातन व्यवस्था में कहां हुआ है, वह है पितृ धर्म, पुत्र धर्म, व्यापार धर्म, युद्ध धर्म, पड़ोसी धर्म, आदि पर हुआ है। पूजा पद्धति के साथ धर्म का उल्लेख नहीं हुआ। धर्मात्मा शब्द का उल्लेख पूजा-हवन करने वालों के लिए नहीं हुआ। इसके पूजा पद्धतियों में पैदा जिज्ञासाओं ने मत-मतांतरों में भ्रमण करना शुरू किया। भारत में इस्लाम के आने के बाद के हिंदुत्व को अलग से समझ लीजिए, सबकुछ साफ हो जाएगा। ये बातें राजपूत महापंचायत के अध्यक्ष, प्रखर विद्वान और इतिहासकार राघवेन्द्र सिंह तोमर ने जैन मंदिर तुलसी नगर में आयोजित समारोह में कहीं।
सनातन धर्म है जो सिखाता है शांति
तोमर बुधवार को धर्म पथ युवा सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। तोमर ने कहा कि करीब 1500 साल पहले यहूदी, ईसाइयत और इस्लाम तीन अब्राहम मत आए। इन मतों ने दुनिया को अशांति के रास्ते पर धकेला। दुनिया में धर्म तो केवल एक है सनातन, जो शांति सिखाता है। मजहब तो बहुत हैं। इस्लाम मजहब अशांति और अहिष्णुता सिखाता है। इस्लाम में स्पष्ट है कि दुनिया के काफिरों को पहले इस्लाम में आने की दावत दो, नहीं आएं तो दबाव बनाओ और इस पर भी नहीं मानें तो उन्हें कत्ल कर दो। आज इसी सोच का परिणाम है कि दुनिया अशांति से जल रही है। माता गांधारी के क्षेत्र में उत्पात मचा हुआ है। भारत भूमि और दुनिया को इससे बचाने के लिए धर्म योद्धा चाहिए।


दायित्व सौंपकर पद की शपथ दिलाई
धर्म पथ ऐसे धर्म योद्धा तैयार करेगा जो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों में इस्लाम जैसे मजहबों का सामना करेंगे। लोगों को सही मार्ग बताएंगे। उन्होंने कहा कि लक्ष्य आसान है, बस आवश्यकता है लोगों को इस्लाम के खतरे और सनातन की अच्छाइयां बताने की। वह समय दूर नहीं होगा, जब भारत की सनातन भूमि से ऐसे उपद्रवी मजहबों को उखाड़ फेंकेगे। समारोह में तोमर ने लोकेन्द्र सिंह के नाम की घोषणा धर्म पथ के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में की। खेजड़िया के अलावा अनिमेष सिंह, राधेश्याम प्रजापति, राजकुमार बानखेड़े, विशाल गोस्वामी, धर्मेन्द्र सक्सेना आदि को भी धर्म पथ संस्था में दायित्व सौंपकर पद की शपथ दिलाई गई।
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
समारोह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि एवं विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री खगेन्द्र भार्गव ने कहा कि यह गलत कहा जाता है कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। इस्लाम मजहब बैर सिखाता है। यह सेकुलर लोगों की भाषा है। यह हिंदुत्व की धार को कम करने की भाषा है। हमारे कौन से देवी-देवता हैं, जिनके पास शस्त्र नहीं हैं? भगवान राम ने राज-पाट के साथ सबकुछ छोड़ा, लेकिन शस्त्र नहीं छोड़े। शस्त्र को नहीं छोड़ऩा है क्योंकि शस्त्र ही धर्म की रक्षा करता है। अब सत्यमेव जयते नहीं, शास्त्रमेव जयते होना चाहिए। हमारा सनातन धर्म प्रेम, त्याग जैसे मानवीय मूल्य सिखाता है।
भारत की आत्मा है धर्म
हर राष्ट्र की आत्मा होती है और भारत की आत्मा है धर्म। भारत को बचाना है तो धर्म को बचाना होगा। धर्म निरक्षेपता की आड़ में भारत देश को खत्म करने का षडयंत्र चल रहा है। हिंदुओं के देश में हिंदू धर्म के ही प्रचार की अनुमति नहीं है। उन्होंने महापुरुषों और पूर्वजों के बलिदान की याद दिलाते हुए धर्म निरपेक्षता की आड़ में इस्लाम जैसे मजहबी खतरों से निपटने के लिए युवा शक्ति को तैयार रहने का आह्वान किया। समारोह को संस्कृत महाविद्यालय के आचार्य रघुवीर गोस्वामी ने भी संबोधित किया।

 

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