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MP OBC Caste: मध्यप्रदेश की 32 पिछड़ी जातियों ने की मांग, केंद्र की OBC सूची में शामिल करने के लिए हुई जनसुनवाई

भोपाल में केंद्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसुनवाई हुई, जिसमें मध्यप्रदेश की 32 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग उठी, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का कहना है कि ये जातियां अभी राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण के लाभ से वंचित हैं।

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Vikram Jain
MP OBC Caste: मध्यप्रदेश की 32 पिछड़ी जातियों ने की मांग, केंद्र की OBC सूची में शामिल करने के लिए हुई जनसुनवाई

हाइलाइट्स

  • राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भोपाल में की जनसुनवाई।
  • 32 जातियों ने की OBC सूची में शामिल करने की मांग।
  • आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने दिया विचार का आश्वासन।
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Bhopal OBC Public Hearing: राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक अहम सामाजिक मसले पर जनसुनवाई हुई, जहां मध्यप्रदेश की 32 पिछड़ी जातियों ने केंद्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखीं। ये सभी जातियां खुद को राष्ट्रीय ओबीसी सूची में शामिल करवाना चाहती हैं ताकि उन्हें केंद्रीय आरक्षण योजनाओं का लाभ मिल सके। इस जनसुनवाई में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जनसुनवाई में 32 जातियों ने उठाई आवाज

भोपाल के वीआईपी स्टेट गेस्ट हाउस लालघाटी के सभागार में शुक्रवार को केंद्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अहम जनसुनवाई आयोजित की गई। इसमें राज्य की 32 जातियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और केंद्र की OBC सूची में शामिल होने की मांग की। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग का कहना है कि ये जातियां अभी राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण के लाभ से वंचित हैं, इस पर केंद्रीय आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने कहा कि सभी पक्षों से चर्चा की गई है, और प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

बताया जातियों का इतिहास

जनसुनवाई में 32 जातियों ने अपनी ऐतिहासिक और सामाजिक स्थिति बताई। सभी जातियों के प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने अपना सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सूची में नाम न होने से उन्हें आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। साथ ही जातियों को राष्ट्रीय सूची में शामिल करने की मांग की।

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सुनवाई में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर ने बताया कि सभी पक्षों से विस्तार से बातचीत की गई है और अब इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। सुनवाई में सदस्य भुवन भूषण कमल के अलावा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया एवं सदस्य सीताराम यादव भी शामिल हुए।

आयोग ने कराया जातियों पर सर्वे

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव देवेश मिश्रा ने जानकारी दी कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा मध्यप्रदेश की 32 जातियों को केंद्रीय OBC सूची में शामिल करने को लेकर जनसुनवाई आयोजित की गई है। इन जातियों के प्रतिनिधियों ने खुद को राष्ट्रीय सूची में शामिल करने की मांग की है, ताकि उन्हें केंद्रीय स्तर पर आरक्षण व अन्य योजनाओं का लाभ मिल सके। सचिव मिश्रा ने बताया कि फिलहाल मध्यप्रदेश की 68 जातियां केंद्रीय सूची में शामिल हैं, जबकि राज्य सरकार की सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी जातियों की सूची में कुल 94 जातियां, उपजातियां और वर्ग समूह शामिल हैं।

इन 32 जातियों की स्थिति का आंकलन करने के लिए मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के माध्यम से योजना, आर्थिक और सांख्यिकी विभाग के अंतर्गत विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया। यह सर्वे उनके सामाजिक, शैक्षणिक और सेवा क्षेत्र में पिछड़ेपन को मापने के लिए किया गया था। सर्वे के बाद एकत्र किए गए आंकड़े राज्य शासन को सौंप दिए गए हैं, जिन्हें केंद्रीय आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

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इन जातियों को शामिल करने की मांग

जनसुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश की 32 जातियों और उपजातियों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि उन्हें केंद्रीय पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में शामिल किया जाए। प्रतिनिधियों ने बताया कि इन जातियों को अब तक केवल राज्य स्तर पर ही पिछड़े वर्ग के रूप में मान्यता मिली है, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं और आरक्षण का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

जनसुनवाई में शामिल होकर केंद्रीय सूची में शामिल होने की मांग करने वाली प्रमुख जातियों में शामिल हैं:

दवेज, भोपा मनभाव, दमामी, हरिदास, कोहरी, फूलमाली (फूलमारी), कलार, जायसवाल, डउसेना, लोढ़ा (तंवर), गोलान, गौलान, गवलान, जादम, कुडमी, रूआला-रूहेला, अब्बासी, सक्का, घोषी गवली और गोली।

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इनके अलावा लिंगायत, महाकुल (राउत), थारवार, जमना लोधी, मनधाव डूकर, कोल्हाटी, घड़वा, झारिया, वोवरिया, मोवार, रजवार, सुत सारथी, तेलंगा, तिलंगा, गयार-परधनिया, बया महरा-कौशल, वया थोरिया, खरादी, कमलीगर, संतराम और शेख मेहतर जैसी जातियों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी जातियों को केंद्रीय OBC सूची में जोड़ने की पुरजोर मांग की।

इन जातियों का कहना है कि वे वर्षों से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, लेकिन केंद्रीय सूची में नाम न होने के कारण उन्हें न तो उचित प्रतिनिधित्व मिल पा रहा है और न ही आरक्षण का लाभ।

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