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Bhopal IES University: बिना मान्यता के LLB में एडमिशन, वसूली 55 हजार की फीस, उपभोक्ता आयोग ने विवि को दिया ये आदेश

भोपाल उपभोक्ता आयोग ने एलएलबी छात्र से धोखाधड़ी करने पर IES यूनिवर्सिटी को 55,000 रुपए फीस 9% वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने यह फैसला एलएलबी कोर्स में एडमिशन देने के मामले में सुनाया।

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Vikram Jain
Bhopal IES University: बिना मान्यता के LLB में एडमिशन, वसूली 55 हजार की फीस, उपभोक्ता आयोग ने विवि को दिया ये आदेश

हाइलाइट्स

  • बिना मान्यता के LLB कोर्स में दाखिला देने का मामला।
  • उपभोक्ता आयोग ने छात्र के हक में सुनाया फैसला।
  • उपभोक्ता आयोग ने IES यूनिवर्सिटी को दिया आदेश।
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Bhopal IES University LLB Student Fees Fraud Case: राजगढ़ जिले के एक छात्र के भविष्य से खिलवाड़ करने पर भोपाल उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए IES यूनिवर्सिटी को बड़ा झटका दिया है। बिना मान्यता प्राप्त एलएलबी कोर्स में दाखिला देने और फीस वसूलने पर आयोग ने यूनिवर्सिटी को आदेश दिया है कि वह न केवल फीस वापस करे, बल्कि छात्र को मानसिक पीड़ा और मुकदमे का खर्च भी अदा करे। आयोग ने आईईएस यूनिवर्सिटी के खिलाफ एकपक्षीय फैसला सुनाया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, राजगढ़ जिले के ब्यावरा तहसील के गांव गुजरीबे निवासी जितेंद्र सौंधिया ने भोपाल स्थित IES यूनिवर्सिटी में तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स में 31 मार्च 2023 को दाखिला लिया था। इसके लिए उन्होंने 55,000 रुपए फीस जमा की थी साथ ही अपने मूल दस्तावेज भी यूनिवर्सिटी को सौंप दिए। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही कक्षाएं शुरू होंगी।

कक्षाएं नहीं हुईं शुरू, सामने आई सच्चाई

काफी इंतजार के बाद भी जब कक्षाएं शुरू नहीं हुईं और यूनिवर्सिटी से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, तो जितेंद्र ने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जांच की। वहां से उन्हें पता चला कि यूनिवर्सिटी को एलएलबी कोर्स संचालित करने की मान्यता ही नहीं है। इस धोखाधड़ी से छात्र का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो गया।

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आयोग की सुनवाई और फैसला

जब बार-बार अनुरोध के बावजूद न तो फीस लौटाई गई और न ही मूल दस्तावेज, तब छात्र जितेंद्र सौंधिया ने 3 मार्च 2025 को भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (क्रमांक-1) में विधिवत शिकायत दर्ज की। आयोग द्वारा IES यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजा गया, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन ने न तो कोई जवाब दिया और न ही सुनवाई में उपस्थित हुआ।

इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आयोग की बेंच के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्या डॉ. प्रतिभा पांडेय ने नियमों के अनुसार एकपक्षीय सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई। पीठ ने छात्र के पक्ष में निर्णायक फैसला सुनाते हुए यूनिवर्सिटी को दोषी ठहराया और उसे फीस वापसी, मुआवजा और कानूनी खर्च अदा करने का आदेश दिया।

आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने बिना मान्यता के एडमिशन लेकर छात्र के साथ धोखाधड़ी की है। यह न केवल अनुचित व्यापार प्रथा है बल्कि स्पष्ट रूप से सेवा में कमी भी है।

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आयोग के आदेश में क्या कहा गया?

  • यूनिवर्सिटी छात्र को 55,000 रुपये फीस 9% वार्षिक ब्याज सहित लौटाए।
  • मानसिक कष्ट और सेवा में कमी के लिए 10,000 रुपये क्षतिपूर्ति अदा करे।
  • 3,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में अलग से दे।
  • यदि आदेश के दो महीने के भीतर राशि नहीं लौटाई जाती, तो ब्याज की गणना 3 मार्च 2025 से की जाएगी।
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