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Bhopal AIIMS News : कैंसर रोगियों के लिए बड़ी खुशखबरी, न दवा, न कोई साइड इफैक्ट, भोपाल एम्स में ब्रैकीथेरेपी से इंटरस्टीशियल इम्प्लांट

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Preeti Dwivedi
Bhopal AIIMS News : कैंसर रोगियों के लिए बड़ी खुशखबरी, न दवा, न कोई साइड इफैक्ट, भोपाल एम्स में ब्रैकीथेरेपी से इंटरस्टीशियल इम्प्लांट

भोपाल। Bhopal AIIMS News  भोपाल एम्स में बीते दिनों एक दुर्लभ ट्यूमर के mp breaking news आपरेशन के बाद एक बार फिर एक जटिल आपरेशन को सफल बनाया गया है। जी हां एमपी पहली बार ब्रैकीथेरेपी brachytherapy से इंटरस्टीशियल इम्प्लांट interstitial implant किया गया है। इस इम्प्लांट की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे शरीर के अन्य हिस्सों को रेडियेशन के बिना नुकसान पहुंचाए किया जाता है।

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ब्रैकीथेरेपी क्यों है खास — brachytherapy 
आपको बता दो तरह की थैरेपी में रेडिएशन थैरेपी को इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इसमें मरीज को न तो दवा खाने की जरूरत पड़ती है और न ही इसका शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। भोपाल एम्स में इसी ब्रैकीथेरेपी से कैंसर के इलाज के लिए इंटरस्टीशियल इम्प्लांट किया गया है। ये एक तरह की रेडिएशन थेरेपी ही है। जिसे ब्रैकीथेरेपी कहा जाता है। इसकी खास बात ये होती है कि इसमें शरीर के अंदर ट्यूमर पर सीधे रेडिएशंस डाल कर कैंसर का इलाज किया जाता है।

दो तरह की होती है रेडिएशन थैरेपी — Radiation therapy

आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि रेडिएशन थेरेपी दो तरह से होती है। यानि जिसमें रेडिएशन से इलाज किया जाता है। एक मशीन से बनने वाले रेडिएशंस और दूसरे प्राकृतिक रूप से जैसे रेडिएम के रेडिएशंस। इसमें से मशीन से निकलने वाले रेडिएशन जो होते हैं उसके द्वारा इलाज किए जाने पर वे आपके पूरे शरीर पर पड़ते हैं। वो ऐसे क्योंकि इसमें पेशेंट को मशीन पर लेटाकर एक्स-रे की किरणें या रेडिएशंस उस पर पड़ते हैं। मान लीजिए आपको पेट का कैंसर होने पर मशीन के रेडिएशंस आपके पेट की स्किन से होते हुए अंदर जाएंगे। इससे आपके शरीर को भी नुकसान होता है। इसे एक्सटर्नल बीम रेडियोथेरेपी कहा जाता है।

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2 से 3 दिन में होगा पूरा इलाज 
ब्रैकीथेरेपी में नैचुरली मिलने वाले रेडिएशंस को सीधे कैंसर cancer की जगह पर डाला जाता है। रेडिएम के तारों को ट्यूब के माध्यम से शरीर के अंदर डाला जाता है। इनसे निकलने वाले रेडिएशंस सीधे ट्यूमर पर पड़ते हैं। इससे शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान नहीं होता। 2 से 3 दिनों के बाद ट्यूब को शरीर से बाहर निकाल लिया जाता है।

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