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Baisakhi 2023: आज देशभर में बैशाखी की धूम ! गोल्डन टेंपल से लेकर पंजाब के कई गुरूद्वारों में श्रद्धालुओं ने की अरदास

सिखों के पर्व बैसाखी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है तो वहीं पर आज इस खास मौके पर श्रद्धालुओं ने अमृतसर में स्थित गोल्डन टेंपल के सरोवर में पवित्र स्नान किया।

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Bansal News
Baisakhi 2023: आज देशभर में बैशाखी की धूम ! गोल्डन टेंपल से लेकर पंजाब के कई गुरूद्वारों में श्रद्धालुओं ने की अरदास

Baisakhi 2023: आज देश भर में सिखों के पर्व बैसाखी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है तो वहीं पर आज इस खास मौके पर श्रद्धालुओं ने अमृतसर में स्थित गोल्डन टेंपल के सरोवर में पवित्र स्नान किया। इसके अलावा कई राज्यों में स्थित गुरूद्वारों में पहुंचकर श्रद्धालु अरदास कर रहे है।

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पंजाब: बैसाखी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने अमृतसर में स्थित गोल्डन टेंपल के सरोवर में पवित्र स्नान किया।
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उत्तराखंड: बैसाखी पर्व के अवसर पर हरिद्वार में हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं ने पावन स्नान किया।

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दिल्ली:  बैसाखी के मौके पर गुरुद्वारा बंगला साहिब में श्रद्धालुओं ने अरदास की।

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https://twitter.com/i/status/1646687483940450304

पंजाब: बैसाखी के मौके पर श्रद्धालु बठिंडा में तलवंडी साबो के तख्त श्री दमदमा साहिब गुरुद्वारा पहुंचे।

https://twitter.com/i/status/1646686864127176704

 बैसाखी के अवसर पर रूपनगर के आनंदपुर साहिब में गुरुद्वारा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रार्थना की।

https://twitter.com/i/status/1646685758563172352

जानिए क्यो मनाते है बैसाखी

आपको बताते चलें कि, सिख समुदाय के नव वर्ष की शुरुआत बैसाखी से होती है, जहां पर देश के कई राज्यों में बैसाखी का त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें खास तौर पर बैसाखी का पर्व पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में धूमधाम से मनाया जाता है। बैसाखी का त्योहार वैशाख के महीने में रबी की फसल पक जाती हैं और उनकी अच्छी पैदावार के लिए इस दिन अनाज की पूजा कर, प्रभु को धन्यवाद करने के लिए मनाई जाती है। यह पंजाबी विशेषकर सिख समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है, इस दिन लोग नए कपड़े पहनकर एक दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।

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इस वजह से मनाते है

बता दे कि, यह पर्व के पीछे एक कहानी जुड़ी है जहां पर सिखों  के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, इसके अलावा बैसाखी के दिन महाराजा रणजीत सिंह को सिख साम्राज्य का प्रभार सौंपा गया था।  जिन्होंने एकीकृत राज्य की स्थापना की थी, तब से इसे बैसाखी के तौर पर मनाया जाता है।

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