ULFA Assam Peace Accord:असम में 40 साल बाद उग्रवाद का अंत! ULFA और केंद्र सरकार के बीच हुआ शांति समझौता

ULFA Assam Peace Accord: असम में 40 साल बाद उग्रवाद का अंत! ULFA और केंद्र सरकार के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

ULFA Assam Peace Accord:असम में 40 साल बाद उग्रवाद का अंत! ULFA और केंद्र सरकार के बीच हुआ शांति समझौता

ULFA Assam Peace Accord: यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के वार्ता समर्थक गुट ने हिंसा छोड़ने, संगठन को भंग करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति व्यक्त करते हुए शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्र और असम सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

अब तक 10 हजार लोगों ने गंवाई जान

शाह ने कहा कि यह असम के लोगों के लिए बहुत बड़ा दिन है। उन्होंने कहा, ‘असम लंबे समय तक उल्फा की हिंसा से त्रस्त रहा और वर्ष 1979 से अब तक 10 हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।’

उन्होंने कहा कि असम का सबसे पुराना उग्रवादी संगठन उल्फा(ULFA Assam Peace Accord) हिंसा छोड़ने, संगठन को भंग करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत असम को एक बड़ा विकास पैकेज दिया जाएगा।

अपराधिक मामलों में आएगी कमी

शाह ने कहा कि समझौते के प्रत्येक खंड को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब असम में हिंसा(ULFA Assam Peace Accord) की घटनाओं में 87 प्रतिशत, मौत के मामलों में 90 प्रतिशत और अपहरण की घटनाओं में 84 प्रतिशत की कमी आई है।

मुख्यमंत्री शर्मा ने समझौते को ‘ऐतिहासिक’ बताया और कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री शाह के मार्गदर्शन और नेतृत्व के कारण संभव हो सका है।

12 साल की चर्चा का नतीजा

अधिकारियों ने बताया कि अरबिंद राजखोवा के नेतृत्व वाले उल्फा गुट और सरकार के बीच 12 साल तक बिना शर्त हुई वार्ता के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस शांति समझौते से असम में दशकों पुराने उग्रवाद के खत्म होने की उम्मीद है।

परेश बरुआ की अध्यक्षता वाला उल्फा का कट्टरपंथी गुट हालांकि इस समझौते का हिस्सा नहीं है। ऐसा माना जाता है कि बरुआ चीन-म्यांमा सीमा के निकट एक स्थान पर रहता है।

1979 बना था ULFA उग्रवादी संगठन

उल्फा का गठन 1979 में ‘संप्रभु असम’ की मांग को लेकर किया गया था। तब से, यह विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहा है जिसके कारण केंद्र सरकार ने 1990 में इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था।

राजखोवा गुट तीन सितंबर, 2011 को सरकार के साथ शांति वार्ता में उस समय शामिल हुआ था, जब इसके और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच इसकी गतिविधियों को रोकने को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

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