हाइलाइट्स
- दिल्ली में अमित शाह की बैठक, बिहार चुनाव पर बड़ी रणनीति तय होगी
- एनडीए में सीट बंटवारे और बूथ मैनेजमेंट पर मंथन
- पीएम मोदी की संभावित रैलियों पर भी हो सकती है चर्चा
Amit Shah meeting Bihar Election 2025: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 3 सितंबर को दिल्ली में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर एक अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक एनडीए की बिहार चुनाव रणनीति को अंतिम रूप देने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। इसमें बिहार के दोनों उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी, भारतीय जनता पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े, सह प्रभारी दीपक प्रकाश समेत एनडीए के कई नेता शामिल होंगे।
बताते चलें कि इस बैठक में सीट बंटवारे, बूथ मैनेजमेंट और चुनावी रणनीतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
सीट बंटवारे पर होगा मंथन
बैठक का मुख्य एजेंडा एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सहमति बनाना है। बिहार की राजनीति में सीट शेयरिंग हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है और इस बार भी भाजपा और जेडीयू के बीच तालमेल पर सबकी नजरें टिकी हैं।
इसके अलावा गठबंधन के सहयोगी दलों वीआईपी और हम पार्टी को लेकर भी चर्चा हो सकती है। अमित शाह इस बैठक के जरिए सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सीटों को लेकर किसी भी तरह की खींचतान चुनावी तैयारी को प्रभावित न करे।
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जातिगत व सामाजिक समीकरण बिहार चुनाव सफलता की कुंजी
बैठक में बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती और सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। भाजपा और एनडीए का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में जातिगत और सामाजिक समीकरण चुनावी सफलता की कुंजी साबित होते हैं।
यही वजह है कि पार्टी अपने बूथ कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को पहले से ही सक्रिय करने की तैयारी में है। बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि किन वर्गों और समुदायों में एनडीए अपनी पकड़ को और मजबूत बना सकता है।
पीएम मोदी के रोड शो और रैली पर होगी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार यात्राओं को लेकर भी चर्चा हो सकती है। चुनावी माहौल में मोदी की रैलियों और रोड शो को भाजपा की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। यह संभावना जताई जा रही है कि चुनाव से पहले प्रधानमंत्री की कई सभाएं बिहार के अलग-अलग इलाकों में कराई जाएंगी, ताकि गठबंधन का जनाधार और ज्यादा मजबूत हो सके।
2020 चुनाव पर नजर डालें तो…
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 125 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया था। इसमें भाजपा ने 74 और जेडीयू ने 43 सीटें जीती थीं। वीआईपी और हम पार्टी को चार-चार सीटें मिली थीं। हालांकि विपक्षी महागठबंधन भी 110 सीटों के साथ बेहद मजबूत स्थिति में था और वोट शेयर का अंतर केवल दो फीसदी पर सिमटा था।
एनडीए ने कुल 38 फीसदी वोट शेयर हासिल किया था जबकि महागठबंधन को लगभग 36 फीसदी वोट मिले थे। कड़े मुकाबले और एंटी-इनकम्बेंसी के बावजूद एनडीए सरकार बनाने में सफल रहा और नीतीश कुमार सातवीं बार मुख्यमंत्री बने थे।
AIMIM और वाम दलों ने भी कई सीटों पर असरदार प्रदर्शन किया था, जिसने चुनाव को और पेचीदा बना दिया था।
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बिहार में मतदाता सूची को लेकर पिछले कुछ महीनों से तेज बहस चल रही है। विपक्ष ने भी इसे खास मुद्दा बनाया है। राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान चुनाव आयोग ने बताया पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।