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Akshaya Tritiya अक्षय तृतीया पर घट भरना क्यों हैं जरूरी: क्यों होती है गुड्डा-गुड़ियों की शादी, जानें पांच बड़ी बातें

Akshaya Tritiya Fact: अक्षय तृतीया पर घट भरना क्यों हैं जरूरी, क्यों की जाती है गुड्डा-गुड़ियों की शादी, जानें पांच बड़ी बातें

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Preeti Dwivedi
Akshaya Tritiya अक्षय तृतीया पर घट भरना क्यों हैं जरूरी: क्यों होती है गुड्डा-गुड़ियों की शादी, जानें पांच बड़ी बातें

Akshaya Tritiya 2024 Fact: आज 10 मई को अक्षय तृतीया मनाई जा रही है। इस दिन से जुड़ी हुई कई परंपराएं हिन्दू धर्म में निभाई जाती हैं। पहले के समय में इस दिन बड़ के पेड़ के नीचे गुड्डा-गुड़ियों की शादी की जाती थी।

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कई जगहों पर आज भी अक्षय तृतीया के मौके पर गुड्डा-गुड़ियों की शादी (Gudda Gudiyon ki Shadi) की जाएगी। लेकिन क्या आपको पता है ऐसा क्यों (Know why Gudda-dolls get married) किया जाता है। हिन्दु धर्म में अक्षय तृतीया पर इनका विवाह करने की परंपरा काफी पुरानी है।

आइए हम आपको बताते हैं इस त्योहार से जुड़ी कुछ महत्तपूर्ण बातें।

इसलिए रखे जाते हैं घट

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया पर घट रखने की भी परंपरा है।

घट को हर काम की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।

अक्षय तृतीया पर घट में पानी भरकर उसमें सत्तू, ककड़ी, आम, चीमरी आदि डालकर उसका दान करना चाहिए।

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कहते हैं घट यानि कलश में सभी देवता वास होता है।

ऐसी मान्नत मानी जाती है कि हे वरूण देव जिस प्रकार आपमें सभी नदियां, जल और रत्न समाहित हैं, उसी तरह हमारी भी रिद्धि—सिद्धि बनी रहे। इसी दिन से घरों में मटके रखना शुरू हो जाते हैं।

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ताकि जल्दी हो विवाह

पंडित सनत कुमार खम्परिया के अनुसार जिन युवक-युवतियों के विवाह में विलंब होता है है। उनके लिए ये परंपरा काफी पुराने समय से चली आ रही हैं। इसके लिए मिट्टी के गुड्डा-गुड़ियों का विवाह वट वृक्ष के नीचे कराया जाता है।

इतना ही नहीं इसके लिए सांकेतिक रूप में दोनों की गांठें भी बांधी जाती हैं। इसे बांधने के बाद ये गांठ फिर वट अमावस के दिन खोली जाती है।

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अक्षय तृतीया पर क्यों लगाते हैं ऋतु फलों का भोग

आपको बता दें अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2024 Fruit)  पर भगवान को नए ऋतु फलों का भोग लगाने की परंपरा है। किसी भी ऋतु फल को सबसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता है। उसके बाद ही उसका सेवन किया जाता है। इसी उद्देश्य से आम, तरबूज और खास तौर पर सत्तू का भोग अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya Bhog) पर लगाया जाता है। फिर इस दिन से ऋतु फल के सेवन की शुरूआत होती है। मौसम की दृष्टि से भी माने तो अक्षय तृतीया तक थोड़ी बहुत बारिश हो जाती है तो ये सेहत पर दुष्प्रभाव नहीं डालता है।

अक्षय सौभाग्य प्राप्ति का वरदान

ऐसा माना जाता है कि वट वृक्ष सभी को सौभाग्य (Vat Puja) प्रदान कराता है। यही कारण है कि इस दिन सुहागनें भी वटवृक्ष के नीचे पूजा करके सौभाग्य प्राप्ति का वरदान मांगती हैं। मान्यता अनुसार इस दिन वृक्ष के नीचे जो भी मन्नत मांगी जाती है वह जरूर पूरी होती है। जो व्यक्ति अपने जन्मदिन दिन वट वृक्ष के नीचे खड़े होकर जो भी मन्नत मांगता है, वो पूरी होती है।

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