Agni Keli: आस्था और अग्नि का अद्भुत संगम, मंगलुरु का अग्नि केली उत्सव: जहाँ आस्था की परीक्षा अग्नि से होती है!
हर वर्ष कर्नाटक के मंगलुरु में स्थित कतील श्री दुर्गा परमेश्वरी मंदिर में एक अद्भुत, रोमांचकारी और आध्यात्मिक उत्सव का आयोजन होता है, जिसे अग्नि केली के नाम से जाना जाता है।
इस प्राचीन परंपरा के अंतर्गत, सैकड़ों श्रद्धालु एक-दूसरे पर जलते हुए ताड़ के पत्ते फेंकते हैं, न तो क्रोध में, और न ही द्वेष से, बल्कि यह कार्य पूर्ण श्रद्धा, साहस और भक्ति भाव से प्रेरित होता है। यह अनूठा अग्नि अनुष्ठान माँ दुर्गा को समर्पित होता है, जहाँ अग्नि को समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है।
यह आयोजन रात्रि के समय संपन्न होता है, जब मंदिर प्रांगण मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक संगीत की गूंज से जीवंत हो उठता है। चिंगारियों से भरी अग्नि, जलती हुई मशालें, और भक्तों की ऊर्जा, मिलकर एक ऐसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं, जिसे देखना किसी दिव्य अनुभूति से कम नहीं होता।
अग्नि केली मात्र एक त्योहार नहीं है, यह एक सदियों पुरानी परंपरा है, जो आज भी उसी श्रद्धा और उल्लास के साथ जीवित है।
यहाँ अग्नि केवल जलती नहीं, बल्कि जगाती है, आस्था की लौ, शक्ति का संकल्प और संस्कृति की चेतना।
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